11 जून, 2026, मोतिहारी, बिहार
सतत कृषि को बढ़ावा देने और मृदा स्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी ने भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय स्टेशन, पूसा, समस्तीपुर के सहयोग से भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, मोतिहारी में अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) योजना के अंतर्गत "खेत बचाओ अभियान" पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।
यह कार्यशाला राष्ट्रव्यापी "खेत बचाओ अभियान 2026" के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य की रक्षा करना, रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना तथा वैज्ञानिक एवं सतत कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह उपस्थित रहे। इस अवसर पर बिहार सरकार के दुग्ध, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री श्री नंद किशोर राम, विधायक श्री कृष्ण नंदन पासवान तथा किसान नेता मनोज पासवान भी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए श्री राधा मोहन सिंह ने दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए मृदा संरक्षण और सतत पोषक तत्व प्रबंधन के महत्वपूर्ण महत्व पर बल दिया। उन्होंने नियमित मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्डों के प्रभावी उपयोग तथा उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग, विशेष रूप से यूरिया के अंधाधुंध प्रयोग को कम करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने खेत बचाओ अभियान के क्रियान्वयन में भाकृअनुप संस्थानों के प्रयासों की सराहना की, जो कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा निकटता से निगरानी की जा रही एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य की बहाली और कृषि लाभप्रदता में सुधार करना है।
अपने स्वागत संबोधन में डॉ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, ने केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा परिकल्पित इस अभियान की दृष्टि को रेखांकित किया। उन्होंने जानकारी दी कि आईसीएआर-एमजीआईएफआरआई के वैज्ञानिक 1–30 जून, 2026 के दौरान बिहार भर में गांव स्तर पर गहन जनसंपर्क कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं, ताकि उर्वरकों के संतुलित उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य बहाली तथा जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा सके।
कार्यक्रम में पूर्वी चंपारण जिले के पांच प्रखंडों (कोटवा, तुरकौलिया, मोतिहारी, पिपराकोठी और चकिया) के लगभग 550 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तकनीकी सत्रों के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य में सुधार और फसल उत्पादकता को बनाए रखने के लिए उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग, फसल प्रणालियों में दलहनी फसलों को शामिल करने, हरी खाद, वर्मी कम्पोस्टिंग, फसल अवशेष प्रबंधन तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व के प्रति जागरूक किया।

ज्ञान के प्रसार को सुदृढ़ करने के लिए वैज्ञानिकों ने हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन तथा प्राकृतिक खेती के आदानों की तैयारी पर व्यावहारिक प्रदर्शन किए, जिससे किसानों को पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रौद्योगिकियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।
एससीएसपी के अंतर्गत किसान सहायता पहल के तहत आयोजकों द्वारा क्षेत्र की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप पीएनआर-381, पूसा-44 और पूसा-1824 किस्मों के 25 क्विंटल गुणवत्तायुक्त धान बीज, 325 आम के पौधे (अम्रपाली, पूसा अरुणिमा और मल्लिका) तथा 200 लीची के पौधे (शाही और चाइना लीची) वितरित किए गए।
यह कार्यशाला वैज्ञानिक कृषि प्रौद्योगिकियों के प्रसार, किसानों की क्षमता निर्माण, सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा अनुसूचित जाति किसान समुदायों के बीच गुणवत्तायुक्त कृषि आदानों के वितरण के लिए एक प्रभावी मंच सिद्ध हुई।
कार्यक्रम का आयोजन भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह के समग्र मार्गदर्शन में किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार)







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