जिला परिषद सदस्यों और किसानों ने भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना में वैज्ञानिकों के साथ मिलकर सतत मृदा स्वास्थ्य और आजीविका संवर्धन को दिया बढ़ावा

जिला परिषद सदस्यों और किसानों ने भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना में वैज्ञानिकों के साथ मिलकर सतत मृदा स्वास्थ्य और आजीविका संवर्धन को दिया बढ़ावा

9 जून, 2026, पटना

भाकृअनुप-पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर ने खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत "जिला परिषद सदस्यों एवं प्रगतिशील किसानों की बैठक" विषय पर एक सम्मेलन-सह-कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य जनप्रतिनिधियों और किसानों के बीच सतत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।

कार्यक्रम में श्रीमती कुमारी स्तुति, अध्यक्ष, जिला परिषद, पटना तथा श्रीमती सरोज देवी, अध्यक्ष, जिला परिषद, बक्सर के साथ पटना और बक्सर जिलों के जिला परिषद सदस्य, प्रगतिशील किसान, वैज्ञानिक और संस्थान के कर्मचारी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए श्रीमती कुमारी स्तुति ने कृषि की स्थिरता और ग्रामीण समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों, स्थानीय शासन निकायों और कृषक समुदायों के बीच सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्थान-विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के विकास में संस्थान के प्रयासों की सराहना की तथा अनुसंधान संगठनों और ग्रामीण समुदायों के बीच संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

Zila Parishad Members and Farmers Join Hands with Scientists to Promote Sustainable Soil Health and Livelihoods at ICAR-RCER, Patna

श्रीमती सरोज देवी ने जमीनी स्तर पर प्राकृतिक खेती और संसाधन-संरक्षण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और किसानों को मिलकर मृदा स्वास्थ्य में सुधार, खेती की लागत में कमी तथा ग्रामीण परिवारों के लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने किसानों के बीच सफल कृषि नवाचारों के व्यापक प्रसार का भी आह्वान किया।

डॉ. अनुप दास, निदेशक, भाकृअनुप-आरसीईआर, ने निवेश-प्रधान कृषि से ज्ञान-आधारित और संसाधन-कुशल कृषि प्रणालियों की ओर परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जल संरक्षण तथा जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियाँ आने वाले दशकों में सतत कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। उन्होंने मृदा, जल और पर्यावरणीय संसाधनों का संरक्षण करते हुए किसानों की आजीविका में सुधार हेतु वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

संवाद के दौरान जिला परिषद सदस्यों ने प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, पोषण वाटिका विकास, जल संरक्षण पहलों, क्षमता निर्माण तथा सतत आजीविका संवर्धन के लिए गांवों को गोद लेने में आईसीएआर-आरसीईआर के साथ सहयोग करने की अपनी इच्छा व्यक्त की। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि ग्राम स्तर पर समन्वित हस्तक्षेप कृषि उत्पादकता, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय में उल्लेखनीय सुधार ला सकते हैं। कार्यक्रम में उभरती कृषि चुनौतियों का सामना करने के लिए कृषि भूमि के संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य की पुनर्स्थापना तथा सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

Zila Parishad Members and Farmers Join Hands with Scientists to Promote Sustainable Soil Health and Livelihoods at ICAR-RCER, Patna

प्रतिभागी किसानों के लाभार्थ प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और व्यवहारों पर एक तकनीकी प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में सतत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, तनाव-सहनशील फसल किस्मों, डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तथा कुशल जल प्रबंधन प्रौद्योगिकियों पर आधारित प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया। सूखे से संबंधित चुनौतियों को कम करने में सहायता के लिए किसानों को सूखा-सहनशील धान की किस्म स्वर्णा श्रेया के बीज, सब्जियों के बीज तथा रोपण सामग्री उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती पर आधारित एक किसान मार्गदर्शिका का भी विमोचन किया गया।

प्रतिभागियों ने संस्थान की प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी और अनुसंधान फार्मों का भ्रमण किया, जहाँ उन्हें किसान-केन्द्रित नवाचारों, जिनमें प्राकृतिक खेती मॉडल, फल-आधारित पोषण वाटिकाएँ, एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) मॉडल तथा महिला-केंद्रित गृहस्थ प्रौद्योगिकियाँ शामिल थीं, से अवगत कराया गया। जनप्रतिनिधियों ने संसाधन-कुशल और आजीविका-उन्मुख प्रौद्योगिकियों के विकास में संस्थान के प्रयासों की सराहना की तथा आईसीएआर-आरसीईआर के सहयोग से अपने-अपने जिलों में ऐसे प्रकृति-अनुकूल दृष्टिकोणों को बढ़ावा देने में रुचि व्यक्त की।

कार्यक्रम में 13 जिला परिषद सदस्यों, अध्यक्षों और किसानों सहित 75 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा संस्थान द्वारा प्रोत्साहित सतत कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने में गहरी रुचि व्यक्त की।

(स्रोत: भाकृअनुप-पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना)

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