भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद ने तेलंगाना में सेव द फील्ड कैंपेन 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) का किया आयोजन

भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद ने तेलंगाना में सेव द फील्ड कैंपेन 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) का किया आयोजन

9 जून, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-क्रिडा), हैदराबाद, ने भारत सरकार और भाकृअनुप के आह्वान के प्रत्युत्तर में किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सेव द फील्ड कैंपेन 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद ने आज तेलंगाना के महबूबनगर जिले के जडचेरला मंडल के आलूर गाँव में संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर एक जागरूकता अभियान आयोजित किया।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए टिकाऊ मृदा एवं पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा देना था।

किसानों को संतुलित एवं आवश्यकता-आधारित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान यूरिया पर अत्यधिक निर्भरता कम करने तथा रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक स्रोतों और जैव उर्वरकों को सम्मिलित करने वाली समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने पर विशेष बल दिया गया। ऐसी पद्धतियाँ मृदा उर्वरता बनाए रखने, पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार करने तथा टिकाऊ फसल उत्पादन को बढ़ावा देने में सहायक होती हैं।

ICAR-CRIDA, Hyderabad Organizes Save the Field Campaign 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) at in Telangana

वर्षा आधारित कृषि में वर्षा जल संचयन और खेत में ही नमी संरक्षण (इन-सीटू मॉइस्चर कंजर्वेशन) के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। वर्षा जल का प्रभावी संरक्षण और उपयोग मृदा में नमी की उपलब्धता बढ़ा सकता है, शुष्क अवधियों के दौरान फसलों पर पड़ने वाले तनाव को कम कर सकता है तथा जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति कृषि प्रणालियों की सहनशीलता को मजबूत कर सकता है।

कार्यक्रम के दौरान जैव उर्वरकों के उपयोग पर एक व्यावहारिक प्रदर्शन भी आयोजित किया गया। किसानों को जैव उर्वरकों के लाभों के बारे में जानकारी दी गई, जिनमें पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार, उर्वरक लागत में कमी तथा मृदा एवं जैविक गतिविधियों में वृद्धि शामिल है।

कार्यक्रम में कुल 50 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 28 महिला किसान शामिल थीं।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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