भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना द्वारा एकीकृत मत्स्य पालन तकनीकों पर किसानों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना द्वारा एकीकृत मत्स्य पालन तकनीकों पर किसानों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

20-23 मार्च, 2026, पटना

भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर (आरसीईपी), पटना ने 20 से 23 मार्च, 2026 तक “एकीकृत मत्स्य पालन तकनीकों के माध्यम से ग्रामीण आजीविका में सुधार” विषय पर चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों के बीच मत्स्य पालन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण और उद्यमिता को बढ़ावा देना था। साथ ही, यह वैज्ञानिक मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने तथा बेहतर संसाधन प्रबंधन और आय विविधीकरण के लिए एकीकृत मत्स्य पालन तकनीकों को अपनाने पर केन्द्रित था। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बिहार सरकार के मत्स्य पालन विभाग द्वारा प्रायोजित था।

Farmers’ training programme on Integrated Fish Farming Techniques Organised by ICAR RCER, Patna

डॉ. अनुप दास, निदेशक, भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना, ने किसानों के साथ संवाद करते हुए जोर दिया कि आम, अमरूद और नींबू जैसे फलदार वृक्षों के माध्यम से तालाब की मेड़ों का सघनीकरण, तालाब की मेड़ों पर डोलिकोस बीन तथा कुकुर्बिट्स (लौकी, खीरा आदि) की ऊर्ध्वाधर खेती, तथा पशुधन एकीकरण को शामिल करने वाली मत्स्य-आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) न केवल कृषि प्रणाली में विविधता लाएगी और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों के प्रति किसानों की संवेदनशीलता को कम करेगी, बल्कि वर्षभर आय, पोषण और रोजगार भी सुनिश्चित करेगी। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए आईएफएस प्रणाली में स्पॉन उत्पादन, रोपण सामग्री उत्पादन अथवा मशरूम उत्पादन जैसे कम से कम एक उच्च-मूल्य घटक को अवश्य अपनाएँ।

कार्यक्रम में किसानों के साथ तालाब की तैयारी, मछली प्रजातियों के चयन, तालाब प्रबंधन, मछली प्रजनन, स्पॉन पालन, फ्राई प्रबंधन तथा फिंगरलिंग उत्पादन पर संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त, जल गुणवत्ता प्रबंधन, मछली प्रजातियों की पहचान, स्पॉन उत्पादन तथा आहार (फीड) निर्माण पर व्यावहारिक एवं हस्त-प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए। क्षमता निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को आय, पोषण और जलवायु सहनशीलता बढ़ाने के लिए पशुधन–मत्स्य एकीकृत कृषि प्रणाली तथा आईएफएस में उद्यानिकी के एकीकरण को अपनाने की सलाह दी गई। संवाद के दौरान किसानों ने गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीजों की कमी, मत्स्य आहार की उच्च लागत तथा पर्याप्त निदान उपकरणों या स्वास्थ्य प्रबंधन सुविधाओं के अभाव जैसी कई महत्वपूर्ण समस्याएँ उठाईं, जिनके कारण तालाबों का उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित होती है।

Farmers’ training programme on Integrated Fish Farming Techniques Organised by ICAR RCER, Patna

डॉ. टुन टुन सिंह, एडीएफ, बिहार सरकार, ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सरकारी नीतियों और योजनाओं की जानकारी दी तथा मत्स्य + मखाना एकीकृत खेती को एक व्यवहार्य उद्यम के रूप में अपनाने के महत्व पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को खेत-स्तरीय संसाधनों के प्रभावी पुनर्चक्रण के माध्यम से मत्स्य आधारित आईएफएस अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम हो और मत्स्य पालन को एक लाभकारी उद्यम बनाया जा सके।

प्रशिक्षण में बिहार के अररिया जिले के कुल 30 किसानों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना)

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