16 जुलाई, 2026, उमियाम, मेघालय
भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र (एनईएच रीजन), उमियाम ने आज “विकसित भारत @ 2047 के लिए कृषि की पुनर्कल्पना” विषय के तहत 98वां भाकृअनुप स्थापना दिवस पूरे दिन चलने वाले कार्यक्रम के साथ एम. एस. स्वामीनाथन हॉल में मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के निदेशक एवं कर्मचारियों के नेतृत्व में वृक्षारोपण अभियान से हुई।
‘युवा एवं कौशल विकास’ विषय पर मुख्य व्याख्यान देते हुए डॉ. जी. कादिरवेल, निदेशक, भाकृअनुप आरसी एनईएच, उमियाम, ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया और उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए उन्हें प्रासंगिक कौशलों से सुसज्जित करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, जिनमें खेती, पशुपालन, बागवानी, उत्पादन, प्रसंस्करण तथा मूल्य श्रृंखला विकास शामिल हैं, सतत आजीविका और उद्यमिता के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करते हैं।
डॉ. कादिरवेल ने आगे कहा कि उद्यमिता विकास विभिन्न क्षेत्रों में बेरोजगार युवाओं के लिए आशाजनक करियर अवसर प्रस्तुत करता है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं और साथ ही देश की अर्थव्यवस्था में सार्थक योगदान दे सकते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि आईसीएआर युवाओं को आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा इस बात पर जोर दिया कि सार्थक परिणाम प्राप्त करने के लिए सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग आवश्यक है।
यह कार्यक्रम कौशल विकास, उद्यमिता प्रोत्साहन तथा क्षमता निर्माण पहलों के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में संस्थान की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
(स्रोत: भाकृअनुप आरसी अनुसंधान परिसर, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र, उमियाम, मेघालय)







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