29 जून, 2026, गोवा
भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, उत्तर गोवा, भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीसीएआरआई), गोवा के तत्वावधान में, आज उत्तर गोवा के पेरनेम स्थित धारगाल में राष्ट्रीय मिशन खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत सतत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए जैव उर्वरक प्रयोग पर ऑन-फार्म प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों में मृदा उर्वरता बढ़ाने, फसल उत्पादकता में सुधार करने तथा पर्यावरणीय रूप से सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में जैव उर्वरकों के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।
कार्यक्रम में खेत बचाओ अभियान के उद्देश्यों तथा किसान समुदाय के हित में भाकृअनुप-केवीके, उत्तर गोवा द्वारा संचालित विभिन्न प्रौद्योगिकी प्रसार पहलों का परिचय दिया गया। किसानों को सतत पोषक तत्व प्रबंधन में जैव उर्वरकों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया तथा विशेष रूप से धान की खेती में बायो जिंक (जिंक-घुलनशील जैव उर्वरक) की भूमिका पर बल दिया गया।

प्रतिभागियों को इसके उपयोग की विधि तथा जिंक की उपलब्धता बढ़ाने, स्वस्थ फसल वृद्धि को प्रोत्साहित करने एवं उपज में सुधार करने में इसके लाभों से परिचित कराने के लिए बायो जिंक के वैज्ञानिक प्रयोग का खेत पर प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया।
कृषि में जैव उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग पर आयोजित तकनीकी सत्र में बायो जिंक के प्रयोग की विधियों तथा पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने, मृदा में सूक्ष्मजीवीय गतिविधि में सुधार करने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा सतत फसल उत्पादन को समर्थन देने में इसके लाभों पर प्रकाश डाला गया। संवादात्मक सत्र का समापन धान की खेती में जैव उर्वरकों के उपयोग तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पर चर्चा के साथ हुआ, जिसमें विशेषज्ञों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत 25 प्रतिभागियों, जिनमें 10 महिला किसान शामिल थीं, को उनके धान के खेतों में प्रयोग हेतु तरल बायो जिंक (जिंक-घुलनशील जैव उर्वरक) वितरित किया गया, ताकि जिंक की उपलब्धता बढ़ाने, फसल वृद्धि में सुधार करने तथा धान की उत्पादकता बढ़ाने के लिए जैव उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा सके।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)







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