राजस्थान के जोधपुर जिले के नेवरा रोड गाँव की महिलाएं आज ग्रामीण महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का प्रेरणादायी उदाहरण हैं। जो वर्ष 2021 में भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर द्वारा संचालित परियोजना “कृषक महिलाओं की आय दुगनीकरण: खाद्य परीक्षण एवं तकनीक एकीकरण द्वारा उधमिता विकास” से जुड़ीं। परियोजना के अंतर्गत जोधपुर जिले के दस चयनित गाँवों में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (राजीविका) के मॉडल पर महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया। इसी क्रम में नेवरा रोड गाँव की १० ग्रामीण महिलाओं ने मिलकर “गंगा राजीविका स्वयं सहायता समूह” का गठन किया तथा काजरी द्वारा आयोजित विभिन्न तकनीकी एवं उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

काजरी द्वारा तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग
काजरी ने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के क्षमता विकास, तकनीकी उन्नयन, डिजिटलीकरण एवं उद्यमिता विकास पर विशेष ध्यान दिया। परियोजना के अंतर्गत लाभार्थी किसानों के खेतों का GPS आधारित मानचित्रण कर वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा, बागवानी, फसल उत्पादन तथा खाद्य प्रसंस्करण जैसी काजरी द्वारा विकसित तकनीकों को समाहित करते हुए व्यक्तिगत एकीकृत कृषि योजनाएं तैयार की गईं।
महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रत्येक गाँव में प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने हेतु प्रशिक्षण एवं आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। महिलाओं को बाजरा (श्री अन्न) तथा देशी फलों के मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही समूहों को नाबार्ड, राजीविका एवं अन्य वित्तीय संस्थानों से जोड़ने, एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस प्राप्त करने तथा उत्पादों के ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं विपणन में भी सहयोग प्रदान किया गया।

उपलब्धियाँ एवं परिणाम
काजरी से प्राप्त प्रशिक्षण के पश्चात “गंगा राजीविका स्वयं सहायता समूह” की महिलाओं ने बाजरे से विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पाद जैसे बाजरा लड्डू, बाजरा कुरकुरे, बाजरा नमकीन एवं बाजरा खाखरा का व्यावसायिक उत्पादन प्रारम्भ किया। आकर्षक पैकेजिंग, लोगो एवं लेबलिंग के माध्यम से इन उत्पादों को स्थानीय, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के कृषि मेलों, प्रदर्शनियों तथा बाजरा शिखर सम्मेलनों में सफलतापूर्वक विपणन किया गया।
समूह की महिलाओं ने विपणन प्रबंधन, ग्राहक संवाद, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन लेन-देन तथा व्यवसाय संचालन जैसे महत्वपूर्ण कौशल भी विकसित किए। स्थापना के दूसरे वर्ष से ही समूह ने 26 विभिन्न कार्यक्रमों एवं प्रदर्शनियों में भाग लेकर लगभग ₹8 लाख की आय अर्जित की, जिससे समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
महिलाओं को निरंतर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से काजरी संस्थान द्वारा प्रत्येक वर्ष स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस के अवसर पर समूह द्वारा निर्मित बाजरा लड्डुओं का संस्थान में वितरण किया जाता है, जिससे उनके उत्पादों को संस्थागत पहचान एवं स्थायी बाजार उपलब्ध हुआ। इस समूह की महिलाओं को अनेक अवसरों पर राज्य सरकार, नाबार्ड एवं काजरी द्वारा सम्मानित भी किया गया। वर्तमान में इस सनूह की महिलाओं का वर्ष भर का टर्न ओवर 8-10 लाख रुपये है तथा समूह द्वारा स्वयं की बेकरी ईकाई भी स्थापित कर ली गयी है ।

प्रशिक्षण एवं तकनिकी सहयोग का प्रभाव
इसी समूह की सदस्य श्रीमती कमला चौधरी को वर्ष 2023 में काजरी एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (राजीविका) के सहयोग से G-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ, जहाँ उन्होंने राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा में भारत के श्रीअन्न (बाजरा) आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों का प्रदर्शन करते हुए लगभग 20 से अधिक देशों से आए प्रतिनिधियों के समक्ष भारतीय महिला उद्यमिता एवं आत्मनिर्भरता का प्रभावशाली परिचय दिया।
समूह की महिलाओं की लगन, नेतृत्व क्षमता एवं उद्यमशीलता ने उन्हें ग्रामीण महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त उदाहरण बना दिया है। गंगा राजीविका स्वयं सहायता समूह की सफलता की कहानी दूरदर्शन के लोकप्रिय कार्यक्रम “चौपाल चर्चा” के माध्यम से देशभर में प्रसारित की गई, जिससे समूह को व्यापक पहचान मिली।
वर्ष 2024 में काजरी भ्रमण के दौरान केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान, ने समूह द्वारा तैयार किए गए बाजरा प्रसंस्कृत उत्पादों की सराहना की तथा महिला उद्यमिता को ग्रामीण विकास का प्रभावी माध्यम बताया।
हाल ही में 12 मई, 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के महानिदेशक, डॉ. एम.एल. जाट ने भी गंगा राजीविका स्वयं सहायता समूह के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए इसे काजरी की तकनीकों के सफल हस्तांतरण तथा ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

इस महत्वपूर्ण पहल के परिणाम
समूह के महिला सदस्यों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को उचित तकनीकी प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग, वित्तीय मार्गदर्शन एवं बाजार से जुड़ाव उपलब्ध कराया जाए, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनकर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ कर सकती हैं। काजरी द्वारा विकसित तकनीकों एवं निरंतर मार्गदर्शन ने साधारण ग्रामीण महिलाओं को सफल उद्यमी के रूप में स्थापित किया है। यह मॉडल महिला सशक्तिकरण, बाजरा आधारित उद्यमिता तथा आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण है।
(भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, काजरी, जोधपुर)








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