हाल की अनुसंधान पहलें

हाल की अनुसंधान पहलें

हाल की अनुसंधान पहलें (Recent Research Initiatives)

जीन संपादन (Gene Editing) 
  • निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ कार्यक्रम शुरू किया गया है।
  • पोषण गुणवत्ता बढ़ाना तथा नए जैव-सक्रिय यौगिकों का संश्लेषण करना।
  • संवेदनशील जीन को लक्षित करके रोग-प्रतिरोधी किस्मों का विकास करना।
  • 11 संस्थान इस कार्यक्रम में सहयोग कर रहे हैं।
  • फसलें: खीरा, खरबूजा, आलू, प्याज, कसावा, सेब, केला, पपीता, अंगूर, काली मिर्च, अदरक, जीरा, धनिया और गेंदा।
  • T-DNA का एकल-प्रतिलिपि मेंडेलियन पृथक्करण देखा गया। उदाहरण के लिए, पपीते की लाइन संख्या R2P5G2 में 3:1 का अनुपात देखा गया, जिसमें 31 T-DNA-पॉजिटिव तथा 11 नल पौधे थे।
  • CRISPR-Cas9 प्रणाली तथा pelota जीन को लक्षित करने वाले 2 gRNAs के माध्यम से बेगोमोवायरस-प्रतिरोधी टमाटर के पौधों का विकास।
 
मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) एवं ड्रोन का अनुप्रयोग 
  • भू-सत्यापन (Ground Truth), UAV तथा उपग्रह डेटा के संयुक्त उपयोग से फसल की विशिष्ट पहचान के आधार पर फसल क्षेत्रफल का आकलन करने हेतु मॉड्यूल एवं प्रोटोकॉल विकसित किया गया है, जिसकी सटीकता 85% से अधिक है।
  • पत्तियों पर छिड़काव के लिए UAV का उपयोग।

 

 

सेंसरों का अनुप्रयोग (Application of Sensors) 
  • अंगूर के बागों की स्वचालित निगरानी के लिए प्रोटोटाइप विकसित किए गए हैं।
  • मृदा नमी सेंसर मिट्टी में नमी की मात्रा मापते हैं।

 

 

परागणकर्ता एवं पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ (Pollinators and Ecosystem Services) 

पॉलीहाउस में मधुमक्खियों की सहायता से परागण

  • Apis cerana तथा Tetragonula iridipennis
  • फल-स्थापन की दर 80 से 90% तक तथा लगभग 2.5 गुना वृद्धि।
  • खुले खेतों की तुलना में अधिक उपज।

परागणकर्ताओं के संरक्षण हेतु मधुमक्खी-अनुकूल पुष्पीय जीनोटाइप एवं पालन संरचनाएँ।

 

ऊर्ध्वाधर खेती एवं शहरी परिधीय बागवानी (Vertical Farming and Peri-urban Horticulture)

  • VEGFAST — छतों पर सब्जियाँ उगाने की तकनीक।
  • अरका वर्टिकल गार्डन संरचना।
  • अरका वेजिटेबल गार्डन मॉडल।
  • पर्ण-सजावटी पौधों के लिए वर्टिकल गार्डन।
  • अरका सस्य पोषक रस (ASPR) — मृदाविहीन खेती के लिए तरल पोषक तत्त्वों का मिश्रण।
 

डिजिटल बागवानी (Digital Horticulture)

  • टमाटर में सेंसर-आधारित नियंत्रित सिंचाई प्रणाली।
  • कंद फसलों में ई-क्रॉप आधारित स्मार्ट खेती (e-CBSF)।
  • केले में पत्ती धब्बा रोग एवं अन्य कीटों के प्रबंधन हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निर्णय-सहायता प्रणाली।
  • ताड़ के पौधों के स्वास्थ्य का अवरक्त (IR) तकनीक एवं UAV की सहायता से पता लगाना।
 

बागवानी फसलों (केला, आम एवं अनार) के निर्यात हेतु प्रोटोकॉल

  • ICAR-CISH, लखनऊ, राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केंद्र (NRC Pomegranate) तथा राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (NRC Banana) ने APEDA के सहयोग से अमेरिका (US) एवं यूरोपीय संघ (EU) को आम, केला और अनार के निर्यात हेतु प्रोटोकॉल का मानकीकरण किया है।
 

स्वच्छ पौध कार्यक्रम (Clean Plant Program)

  • मुख्य सिद्धांत: “स्वस्थ पौध सामग्री से शुरुआत करें और उसे स्वस्थ बनाए रखें।”
  • इस परियोजना का उद्देश्य बागवानी किसानों को प्रमाणित, रोग-मुक्त रोपण सामग्री उपलब्ध कराने की सुविधा में सुधार करना है।
  • इससे उपज एवं फसल की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • चिह्नित फसलें: बादाम, सेब, एवोकाडो, बेरी, सिट्रस फल, अंगूर, अमरूद, लीची, आम, अनार और अखरोट।

 

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