प्रमुख प्रौद्योगिकियाँ

प्रमुख प्रौद्योगिकियाँ

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प्रमुख प्रौद्योगिकियाँ

अर्का माइक्रोबियल कंसोर्टियम

  • इसमें नाइट्रोजन स्थिरीकरण, फॉस्फोरस एवं जिंक घुलनशीलता तथा पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देने वाले सूक्ष्मजीव एक ही फॉर्मूलेशन में सम्मिलित हैं।
  • इसका उपयोग बीज, मिट्टी, सिंचाई जल तथा कोको-पीट जैसे पौधशाला माध्यमों के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है।
  • सूक्ष्मजीवों के सहक्रियात्मक प्रभाव के साथ-साथ खेती की लागत में कमी आती है।
 

केला, आम, खट्टे फलों एवं सब्जियों के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों के फॉर्मूलेशन

  • इसमें Zn, B, Fe, Cu, Mn, Mo एवं Cl जैसे अधिकांश सूक्ष्म पोषक तत्व तथा Ca, Mg, S एवं K जैसे द्वितीयक पोषक तत्व शामिल हैं। इससे उपज में 10–15% तक वृद्धि होती है।
  • इसे किसी भी कवकनाशी या कीटनाशी के साथ मिलाया जा सकता है।
  • फलों की बाहरी बनावट, भंडारण क्षमता तथा स्वाद में सुधार करके उनकी गुणवत्ता बढ़ाता है।
 

मसाला फसलों (काली मिर्च, इलायची, अदरक एवं हल्दी) के लिए फसल-विशिष्ट सूक्ष्म पोषक तत्व मिश्रण

  • इस प्रौद्योगिकी के अंतर्गत 19 वाणिज्यिक लाइसेंस संचालित हैं तथा प्रतिवर्ष लगभग 600 टन सूक्ष्म पोषक तत्वों की बिक्री होती है।
  • इस प्रौद्योगिकी से लक्षित मसाला फसलों के उत्पादन मूल्य में अनुमानित 309 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की वृद्धि हुई है।
  • काली मिर्च, अदरक एवं हल्दी की उपज में 15–25% तक वृद्धि हुई है। इलायची में उपज की लगभग 10% वृद्धि दर्ज की गई है।
 
जैव कीटनाशक 

एनकैप्सुलेटेड जैव-कारक

  • जैव नियंत्रण कारकों को एनकैप्सुलेशन के माध्यम से पहुँचाने की नवीन एवं उन्नत विधि। इसमें अदरक की वृद्धि को बढ़ावा देने तथा रोग नियंत्रण के लिए PGPR का उपयोग किया जाता है।
  • इसे संभालना एवं उपयोग करना आसान है तथा इसकी भंडारण अवधि 18 माह से अधिक है।
  • इसका पेटेंट आवेदन दाखिल किया गया है तथा व्यावसायिक उत्पादन के लिए एक कंपनी को प्रौद्योगिकी हस्तांतरित की गई है।
 

Bacillus subtilis के तरल एवं टैल्क-आधारित फॉर्मूलेशन

  • नवीन जैव नियंत्रण कारक Bacillus subtilis (IIHR BS-2, NAIMCC–B-01211) का तरल एवं टैल्क-आधारित फॉर्मूलेशन। यह जड़-गाँठ सूत्रकृमि (Meloidogyne incognita) के अंडों एवं किशोर अवस्थाओं के विरुद्ध अत्यधिक प्रभावी है।
  • भिंडी में 26.5%, टमाटर में 19.2% तथा केले में 22% तक उपज वृद्धि दर्ज की गई है।
  • भंडारण अवधि 18 माह है।
 

अर्का हर्बीवॉश

  • यह पौधों से प्राप्त पाउडर-आधारित उत्पाद है, जिसका उपयोग फलों एवं सब्जियों को धोकर उनकी सतह पर मौजूद कीटनाशक अवशेषों को कम करने के लिए किया जाता है। यह अवशेषों को 30% या उससे अधिक तक कम कर सकता है।
  • कीटनाशक के प्रकार के आधार पर फलों एवं सब्जियों की सतह से 80–100% तक कीटनाशक अवशेष हटाए जा सकते हैं।
 

अर्का नीम पेलेट

  • यह उपयोग के लिए तैयार उत्पाद के रूप में कीटनाशी प्रभावकारिता एवं भंडारण अवधि बढ़ाता है।
  • नीम बीज पाउडर के पेलेट फॉर्मूलेशन ने डायमंडबैक मॉथ (DBM) के प्रबंधन में अच्छा प्रदर्शन किया।
  • इसका प्रभाव नीम बीज पाउडर के अर्क के समान पाया गया।
 
कटाई-पश्चात प्रबंधन एवं मूल्य संवर्धन 

केले के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कम लागत वाली समुद्री परिवहन प्रौद्योगिकियाँ

  • नेन्द्रन केले को खाड़ी देशों के बाजारों तक समुद्री मार्ग से पहुँचाने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप किया गया। दो खेपों की सफल समुद्री ढुलाई के बाद फेयर एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड, कोच्चि, केरल ने दुबई के लिए प्रत्येक सप्ताह नेन्द्रन केले की समुद्री ढुलाई शुरू कर दी है।
  • इसी प्रकार, थेनी से ग्रैंड नाइन केले यूरोपीय बाजारों में भेजे गए।
 

परासरणीय निर्जलीकरण द्वारा संरक्षित फल एवं सब्जियाँ

  • इनमें ताजे फलों के समान रंग, बनावट एवं स्वाद काफी हद तक बनाए रखा जाता है।
  • सामान्य परिवेशीय परिस्थितियों में छह माह तक भंडारण अवधि।
  • इन उत्पादों में कोई कृत्रिम रंग या स्वादवर्धक पदार्थ नहीं मिलाया जाता है।
 

तत्काल सेवन हेतु तैयार (RTS) जूस

  • कृत्रिम रंग एवं स्वादवर्धक पदार्थ मिलाए बिना तैयार RTS जूस सुरक्षित एवं स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं।
  • आम, केला, अमरूद, अनानास, पैशन फ्रूट, अंगूर, तरबूज आदि से तैयार RTS पेय पदार्थों के मानकीकरण एवं व्यावसायीकरण की प्रक्रिया विकसित की गई है।
 

फ्रूट बार प्रौद्योगिकी

  • यह गाढ़े एवं निर्जलित फलों से तैयार उत्पाद है, जिसमें अच्छा पोषण मूल्य तथा भंडारण क्षमता होती है।
  • इसका सेवन मिठाई या कन्फेक्शनरी उत्पाद के रूप में किया जा सकता है।
  • यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम आकार के उद्योगों में उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
  • यह बच्चों, पर्वतारोहियों तथा रक्षा बलों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
 

अर्का जैकोलेट

  • अर्का जैकोलेट कटहल के बीज के पाउडर एवं मशरूम से तैयार चॉकलेट आधारित उत्पाद है।
  • इसमें कटहल के बीज के पाउडर को मशरूम, तिल, मक्खन आदि के साथ मिलाकर चॉकलेट की परत से ढका जाता है।
  • यह स्वादिष्ट एवं पौष्टिक उत्पाद है, जिसमें 5.0–6.0% प्रोटीन, कम वसा एवं कम कैलोरी तथा अधिक फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि होती है।
 

गोल्डन मिल्क (स्वर्णिम हल्दी दूध)

  • हल्दी दूध से संबंधित उत्पाद “MILMA Golden Milk” एवं “Golden Milk Mix” विकसित किए गए हैं। इनमें एक तैयार-सेवन योग्य, निर्जर्मीकृत एवं स्वादयुक्त हल्दी दूध है तथा दूसरा हल्दी दूध मिश्रण है।
  • मसाला मिश्रण के प्रमुख घटक हल्दी, अदरक एवं दालचीनी हैं।
 

बीज आपूर्ति

  • ICAR-IIHR, बेंगलुरु; ICAR-IIVR, वाराणसी तथा ICAR-NRCSS, अजमेर द्वारा सब्जियों, फूलों एवं बीज मसालों के बीजों की ऑनलाइन बिक्री के लिए बीज पोर्टल विकसित किए गए हैं।
  • इन पोर्टलों को SBI YONO ऐप से जोड़ा गया था।
 

संरक्षित खेती एवं ऊर्ध्वाधर बागवानी

  • ऊर्ध्वाधर बागवानी में लिलियम की खेती।
 

VEGFAST

  • छतों पर सब्जियाँ उगाने की प्रौद्योगिकी।
  • ग्रो बैग एवं ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग।
 

जीन बैंक एवं आजीविका सुरक्षा के लिए देशज फलों की जैव विविधता से जुड़ाव

  • संस्थानों में 40 से अधिक बहुवर्षीय फसलों के फील्ड जीन बैंक का रखरखाव किया जा रहा है।
 
किसानों द्वारा विकसित किस्में 
कटहल
सिद्धू – इसकी फाँकें मीठी एवं ताम्र-लाल रंग की होती हैं। इनमें कैरोटीनॉयड (4.43 mg) तथा लाइकोपीन (1.12 mg/100g) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
(श्री एस. एस. परमेश, तुमकुरु)
 
शंकरा – इसकी फाँकें कुरकुरी एवं ताम्र-लाल रंग की होती हैं। इनमें कैरोटीनॉयड (5.83 mg) तथा लाइकोपीन (2.26 mg/100g) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
(श्री शंकरैया, तुमकुरु)
 
इमली
लक्ष्मण – इसके फल लंबे, चौड़े एवं मुड़े हुए फलियों के आकार के होते हैं। स्थानीय किस्म की तुलना में उपज 250 किग्रा/वृक्ष है, जबकि स्थानीय किस्म की उपज 165 किग्रा/वृक्ष है। गूदा हल्के भूरे रंग का तथा कम रेशेदार है। इसमें 20% अम्लता और 30°B TSS पाया जाता है। गूदे की प्राप्ति अधिक (43%) होती है।
(श्री लक्ष्मण, तुमकुरु)
 

जामुन: वर्षभर फल देने वाली किस्म

  • वर्षभर फलन।
  • उपज: 80 किग्रा/वृक्ष।
  • फल का वजन: 11.3 ग्राम।
  • गूदा-बीज अनुपात: 6.1।
  • कुल घुलनशील ठोस पदार्थ: 13.84°B।
  • फलन अवधि: जून–जुलाई तथा नवंबर–दिसंबर।

(श्री निरंजन, तुमकुरु)

 

आलू में एरोपोनिक्स प्रौद्योगिकी

  • इसका मूल सिद्धांत पौधों को बंद वातावरण में उगाना है, जिसमें जड़ों पर समय-समय पर पोषक तत्वों से भरपूर घोल का छिड़काव किया जाता है।
  • नेट हाउस में उगाने की तुलना में इन-विट्रो पौधों से सात से दस गुना अधिक मिनी-ट्यूबर (लघु कंद) प्राप्त किए जा सकते हैं।
  • टिशू कल्चर से प्राप्त पौधों को मिट्टी के संपर्क एवं रोगजनकों से बचाया जा सकता है।
  • इच्छित आकार के मिनी-ट्यूबर की कई बार तुड़ाई की सुविधा मिलती है।
  • पोषक तत्वों का प्रभावी विनियमन संभव है।
  • जल एवं पोषक तत्वों का कुशल उपयोग होता है।
 

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