भाकृअनुप-नार्म, हैदराबाद, ने “कृषि-मीडिया समन्वय: सहयोगात्मक संचार को बढ़ाना” विषय पर कार्यशाला का किया आयोजन

भाकृअनुप-नार्म, हैदराबाद, ने “कृषि-मीडिया समन्वय: सहयोगात्मक संचार को बढ़ाना” विषय पर कार्यशाला का किया आयोजन

19 अगस्त 2026, हैदराबाद

ICAR–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद ने आज “कृषि-मीडिया समन्वय: सहयोगात्मक संचार को बढ़ाना” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इसका उद्देश्य कृषि अनुसंधान संस्थानों और मीडिया के बीच सहयोग को मजबूत करना तथा किसानों और अन्य हितधारकों तक वैज्ञानिक विकास, प्रौद्योगिकियों और नवाचारों के प्रभावी संचार को बढ़ाना था।

डॉ. आर.एम. सुंदरम, निदेशक, भाकृअनुप-नार्म ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने शोधकर्ताओं, किसानों और अन्य हितधारकों के बीच की खाई को पाटने के लिए एक सुव्यवस्थित संचार रोडमैप की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कृषि अनुसंधान संगठनों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों के प्रभावी प्रसार को सुगम बनाने और कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास के बारे में जन-समझ बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक विकास को सही परिप्रेक्ष्य और सही दिशा में संप्रेषित करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

डॉ. सुंदरम ने प्रभावी जनसंचार के प्रमुख स्तंभों के रूप में रणनीतिक संचार, पारदर्शिता और नवाचार की पहचान की तथा संचार और मीडिया पेशेवरों से विज्ञान को सरल और स्पष्ट बनाने, संस्थागत सीमाओं को दूर करने और वैज्ञानिक ज्ञान को व्यापक जनसमूह के लिए सुलभ बनाने का आह्वान किया।

ICAR-NAARM, Hyderabad Organizes Workshop on “Agri-Media Synergy: Enhancing Collaborative Communication”

मुख्य वक्तव्य में समाचारों में डेटा, तथ्यों, आंकड़ों और इन्फोग्राफिक्स को शामिल करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया, ताकि मानव-केंद्रित कथानकों के माध्यम से वैज्ञानिक खोजों की दृश्यता और जन-समझ को बढ़ाया जा सके। उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरों और स्पष्ट वैज्ञानिक शब्दावली की व्याख्या के साथ छोटे वीडियो सहित उभरती बहु-प्रारूप संचार पद्धतियों को अपनाने की न्यूज़रूम की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बदलते डिजिटल और AI-संचालित मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र में भाकृअनुप प्रौद्योगिकियों की दृश्यता और पहुंच बढ़ाने के लिए ऐसे दृष्टिकोणों को आवश्यक बताया गया।

राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार प्रणाली (एनएआरईईएस) में मानव संसाधनों की क्षमता सुदृढ़ करने की दिशा में अकादमी की प्रमुख गतिविधियों और योगदानों को भी रेखांकित किया गया। संस्थागत संचार को मजबूत करने में भाकृअनुप विज्ञान संचार नीति और इसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यशाला ने मीडिया पेशेवरों और संचार अधिकारियों को कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकियों के अधिक प्रभावी संचार की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साझा मंच प्रदान किया। चर्चाओं में कृषि अनुसंधान और नवाचार के बारे में जन-समझ को मजबूत करने तथा किसानों और आम जनता की सूचना संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निरंतर पेशेवर सहयोग, विश्वसनीय और समयबद्ध जानकारी तथा दर्शक-अनुकूल संचार प्रारूपों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

प्रमुख परिणाम

विचार-विमर्श में कृषि-मीडिया सहयोग को मजबूत करने के लिए कई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई:

कृषि अनुसंधान संगठनों और मीडिया प्रतिनिधियों के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा शोधकर्ताओं, किसानों और अन्य हितधारकों के बीच संचार की खाई को पाटने के लिए एक सुव्यवस्थित संचार रोडमैप विकसित करना।

कृषि प्रौद्योगिकियों और सूचनाओं के व्यापक प्रसार के लिए कृषि अनुसंधान संगठनों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के उपयोग का विस्तार करना, जिसमें क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री भी शामिल हो।

उभरती मीडिया पद्धतियों और बहु-प्रारूप संचार को अपनाना, विशेष रूप से उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरों और छोटे वीडियो को। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि भाकृअनुप-नार्म को भाकृअनुप संस्थानों के नोडल संचार अधिकारियों के लिए जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।

कृषि अनुसंधान, नवाचारों और प्रौद्योगिकियों की सटीक और सुलभ रिपोर्टिंग को सुगम बनाने के लिए मीडिया पेशेवरों को प्रासंगिक डेटा, तथ्य, आंकड़े और इन्फोग्राफिक्स उपलब्ध कराना तथा वैज्ञानिक शब्दावली की स्पष्ट व्याख्या प्रदान करना।

ICAR-NAARM, Hyderabad Organizes Workshop on “Agri-Media Synergy: Enhancing Collaborative Communication”

परिचालन संबंधी बाधाओं की पहचान करना तथा कृषि अनुसंधान संगठनों और मीडिया के बीच पेशेवर समन्वय और सहयोग को मजबूत करना।

मीडिया पेशेवरों के लिए हैदराबाद और उसके आसपास स्थित भाकृअनुप संस्थानों में अध्ययन भ्रमण आयोजित करना, ताकि कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकियों और नवाचारों की बेहतर समझ विकसित हो तथा संस्थागत-मीडिया सहभागिता को मजबूत किया जा सके।

कार्यशाला में प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संगठनों के प्रतिनिधियों, कृषि ब्यूरो प्रमुखों, वरिष्ठ संवाददाताओं, जनसंपर्क अधिकारियों (पीआरओ) और संचार पेशेवरों सहित लगभग 35 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का समापन कृषि अनुसंधान संस्थानों और मीडिया के बीच एक मजबूत, अधिक व्यवस्थित और पेशेवर संपर्क विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, ताकि वैज्ञानिक ज्ञान और कृषि नवाचार समय पर, विश्वसनीय और सुलभ तरीके से किसानों और समाज तक पहुंच सकें।

(स्रोत: राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद)

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