9-11 सितंबर, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-क्रिडा), हैदराबाद, ने 9 से 11 सितंबर, 2026 तक ओडिशा कृषि सूखा शमन परियोजना (ओएडीएमपी) के तहत कृषि-वनीकरण हस्तक्षेपों को सफलतापूर्वक शुरू किया और एक व्यापक घरेलू सर्वेक्षण की शुरुआत की।
कृषि समुदाय के लिए कुशल भूमि उपयोग को बढ़ावा देने और एक मजबूत सहायता प्रणाली प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस कार्यक्रम में ओडिशा के मयूरभंज जिले के रारुआन ब्लॉक की तीन ग्राम पंचायतों के 26 गांवों को लक्षित किया गया।

इस कार्यक्रम के दौरान भाकृअनुप-क्रिडा के वैज्ञानिकों ने 500 इच्छुक लाभार्थियों को कुल 5,979 उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधे वितरित किए, जिनमें 1,500 K-Lime, 1,500 पपीता (रेड बेबी), 1,429 सहजन (PKM-1), 1,000 नारियल (सखीगोपाल) और विभिन्न आम की 550 ग्राफ्ट शामिल थीं।
कृषि-वनीकरण विशेषज्ञों ने इन पांच विभिन्न फलदार वृक्ष प्रजातियों की उचित रोपण तकनीकों पर प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किए तथा घरेलू बगीचों में फलदार वृक्षों को बनाए रखने के दीर्घकालिक आर्थिक और पोषण संबंधी लाभों पर प्रकाश डाला।

कृषि वितरण के समानांतर, घरेलू सर्वेक्षण के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए डेटा गणनाकर्ताओं के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
गुरुचरण मोहंता, सहायक कृषि अधिकारी श्रीमती पुष्पिता और समर्पित ग्राम समिति के सदस्यों ने भाग लिया। प्रशिक्षण ब्रीफिंग के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, गणनाकर्ताओं ने आधिकारिक रूप से क्षेत्रीय सर्वेक्षण अभियान शुरू किया और गोडापलसा तथा रेटेसाही गांवों में घर-घर जाकर आंकड़े एकत्र करने का कार्य शुरू किया। इस सर्वेक्षण के तहत आने वाले समय में कुल 2,000 परिवारों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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