12 अप्रैल, 2026, हैदराबाद
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-क्रिडा), हैदराबाद, के 42वें स्थापना दिवस के अवसर पर संतुलित उर्वरक उपयोग पर एक व्यापक जागरूकता अभियान आयोजित किया गया।
इस अभियान के अंतर्गत भाकृअनुप-क्रिडा के वैज्ञानिकों ने चयनित गांवों में किसान जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण किसान–वैज्ञानिक संवाद रहा, जिसका उद्देश्य संतुलित उर्वरक प्रयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देकर मृदा स्वास्थ्य में सुधार करना था।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक सिफारिशों को अपनाने के महत्व के बारे में जागरूक किया गया, ताकि मृदा उर्वरता बनी रहे और पोषक तत्वों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। विशेषज्ञों ने अत्यधिक और असंतुलित उर्वरक उपयोग के दुष्प्रभावों पर भी प्रकाश डाला और किसानों से दीर्घकालिक स्थिरता के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) अपनाने का आग्रह किया।
विशेषज्ञों ने हरी खाद जैसी तकनीकों के माध्यम से मृदा में जैविक पदार्थ बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया तथा आईएनएम ढांचे के अंतर्गत जैविक संसाधनों और जैव उर्वरकों के समावेशन को प्रोत्साहित किया। संवादात्मक सत्र में किसानों को अपनी जिज्ञासाएं रखने का अवसर मिला, जिनका वैज्ञानिकों ने व्यावहारिक सुझावों के साथ समाधान किया।

यह पहल आगामी खरीफ मौसम से पहले किसानों में व्यापक जागरूकता फैलाने तथा पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक रूप से लाभकारी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई।
कार्यक्रम में लगभग 200 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो टिकाऊ मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के प्रति उनकी रुचि और सहभागिता को दर्शाता है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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