कृषि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षण दक्षता संवर्धन कार्यक्रम भाकृअनुप-नार्म, हैदराबाद में संपन्न

कृषि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षण दक्षता संवर्धन कार्यक्रम भाकृअनुप-नार्म, हैदराबाद में संपन्न

14 अगस्त, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद द्वारा 10–14 अगस्त, 2026 तक आयोजित कृषि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय शिक्षण दक्षता संवर्धन कार्यक्रम आज संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की दक्षताओं को मजबूत करना तथा कृषि शिक्षा में समकालीन, शिक्षार्थी-केन्द्रित दृष्टिकोण को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम में शिक्षण प्रबंधन, संचार, अधिगम मनोविज्ञान, पाठ्यक्रम एवं पाठ योजना, एनईपी 2020 और कृषि शिक्षा, नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियां, शैक्षिक प्रौद्योगिकी, ओईआर और एमओओसी, कृत्रिम मेधा (AI) एवं क्लाउड प्रौद्योगिकियां, मूल्यांकन एवं आकलन, कक्षा प्रबंधन, प्रश्नपत्र निर्माण तथा भावनात्मक बुद्धिमत्ता जैसे प्रमुख विषयों को शामिल किया गया। सूक्ष्म-शिक्षण अभ्यास, एक शैक्षिक भ्रमण और इमर्सिव प्रौद्योगिकियों पर सत्रों ने प्रतिभागियों को अनुभवात्मक अधिगम तथा व्यावहारिक अनुप्रयोग के अवसर भी प्रदान किए।

8 राज्यों और 9 कृषि विश्वविद्यालयों के लगभग 11 संकाय सदस्यों ने कार्यक्रम में भाग लिया, जिससे सहकर्मी अधिगम, पेशेवर नेटवर्किंग और शिक्षण पद्धतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला।

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उद्घाटन सत्र के दौरान डॉ. रमन मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक, भाकृअनुप-नार्म, ने भावी पीढ़ियों को आकार देने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया और शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आलोचनात्मक चिंतन, उद्यमिता, संचार, समस्या-समाधान, टीमवर्क, नेतृत्व और डिजिटल कौशल में दक्षताएं विकसित करने पर बल दिया। साथ ही, प्रासंगिक व्यावहारिक अनुप्रयोगों के साथ कृत्रिम मेधा (AI) और रिमोट सेंसिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को अपनी शिक्षण पद्धतियों पर विचार करने और उन्हें मजबूत करने के अवसर प्रदान किए। विशेष रूप से, सूक्ष्म-शिक्षण सत्रों ने उन्हें अभ्यास करने, प्रतिक्रिया प्राप्त करने और अपनी कक्षा शिक्षण दक्षताओं को बेहतर बनाने में सक्षम बनाया, जिससे कृषि विश्वविद्यालयों में अधिक प्रभावी और रोचक शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में योगदान मिला।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद)

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