केन्द्रीय कृषि मंत्री ने पटना, बिहार में किसान-केन्द्रित कृषि प्रौद्योगिकियों पर भाकृअनुप वैज्ञानिकों और राज्य के हितधारकों के साथ किया संवाद

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने पटना, बिहार में किसान-केन्द्रित कृषि प्रौद्योगिकियों पर भाकृअनुप वैज्ञानिकों और राज्य के हितधारकों के साथ किया संवाद

20 अगस्त 2026, पटना

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज बिहार कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (भीएएमईटीआई), पटना, में आयोजित “किसान महिला, युवा रोजगार, श्रमिक उत्थान सहज कल्याण संवाद” के दौरान वैज्ञानिकों, किसानों, अधिकारियों और अन्य हितधारकों के साथ संवाद किया। इस कार्यक्रम का आयोजन बिहार सरकार के कृषि विभाग द्वारा किया गया था।

संवाद के दौरान श्री चौहान ने बिहार में स्थित भाकृअनुप संस्थानों के निदेशकों, प्रमुखों और वैज्ञानिकों के साथ क्षेत्र-विशिष्ट कृषि प्रौद्योगिकियों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के माध्यम से उनके प्रसार तथा किसानों और अन्य हितधारकों की क्षमता निर्माण पर चर्चा की।

भाकृअनुप प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. राजबीर सिंह, उप-महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप ने किया तथा इसका समन्वय डॉ. रंजय के. सिंह, सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप; डॉ. अनूप दास, निदेशक, भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना; और डॉ. विकास दास, निदेशक, भाकृअनुप-एनआरसी, लीची, मुजफ्फरपुर ने किया।

संवाद में क्षेत्र-विशिष्ट प्रौद्योगिकियों की प्रगति और खेत स्तर पर उनके अपनाने, केवीके के माध्यम से उनके व्यापक प्रसार के तंत्र तथा क्षमता निर्माण पहलों पर ध्यान केन्द्रित किया गया। चर्चा में क्षेत्रीय कृषि प्राथमिकताओं और उन क्षेत्रों से संबंधित मांग-आधारित अनुसंधान की आवश्यकता को भी शामिल किया गया, जहां राज्य सरकार के साथ अधिक सहयोग तथा समन्वय से प्रौद्योगिकी के प्रसार और अपनाने को मजबूत किया जा सकता है।

भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना, की अपनी यात्रा के दौरान श्री चौहान ने कृषि अनुसंधान को किसानों के लिए ठोस लाभों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें विभिन्न संसाधन क्षमताओं वाले किसानों के लिए अनुकूलित एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) मॉडल पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने बहुविध कृषि उद्यमों को एकीकृत करके छोटे और सीमांत किसानों के लिए व्यवहार्य और टिकाऊ आय के अवसर प्रदान करने में सुव्यवस्थित आईएफएस मॉडलों की क्षमता पर प्रकाश डाला।

केन्द्रीय मंत्री ने जोर दिया कि कृषि प्रौद्योगिकियां परिणामोन्मुखी, खेत स्तर पर परीक्षित और विस्तार योग्य होनी चाहिए तथा अनुसंधान संस्थानों से आगे इनके व्यापक अपनाने को सुनिश्चित करने के लिए राज्य की विकास एजेंसियों का प्रभावी सहयोग आवश्यक है। प्राकृतिक खेती के संबंध में उन्होंने किसानों को छोटे स्तर पर इसे अपनाने और खेत स्तर के अनुभव के माध्यम से आत्मविश्वास हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने प्राकृतिक रूप से उत्पादित वस्तुओं के लिए मजबूत बाजार संपर्क विकसित करने के महत्व को भी रेखांकित किया।

श्री चौहान ने किसान-से-किसान विस्तार के महत्व पर भी जोर दिया और प्रगतिशील किसानों के बीच अधिक नेटवर्किंग तथा प्रमाणित प्रौद्योगिकियों, नवाचारों और सफल कृषि मॉडलों के व्यापक प्रसार का आह्वान किया।

संवाद में अनुसंधान-विस्तार संबंधों को मजबूत करने तथा भाकृअनुप, राज्य एजेंसियों, किसानों और बाजारों के बीच समन्वित कार्रवाई को बढ़ावा देने के महत्व को रेखांकित किया गया, ताकि कृषि नवाचार प्रभावी रूप से कृषि आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और टिकाऊ कृषि में योगदान कर सकें।

बीएएमईटीआई, पटना, में आयोजित कार्यक्रम में श्री विजय कुमार सिन्हा, कृषि मंत्री; श्री श्रवण कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री; और श्री दिलीप कुमार जायसवाल, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री, बिहार सरकार ने भी भाग लिया। 400 से अधिक किसानों, युवाओं और महिलाओं ने कार्यक्रम में भाग लिया और कृषि, ग्रामीण आजीविका तथा रोजगार से संबंधित अपने अनुभव, दृष्टिकोण और चिंताएं साझा कीं।

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