मत्स्य विज्ञान की प्रमुख उपलब्धियां

मत्स्य विज्ञान की प्रमुख उपलब्धियां

  • वर्षभर बीज उत्पादन के लिए भारतीय प्रमुख कार्प मछलियों का विस्तारित और बहु-प्रजनन।

  • सघन कार्प पालन की प्रौद्योगिकी और 10-15 टन/हैक्टर/वर्ष उत्पादन स्तर।

  • चयनात्मक प्रजनन के माध्यम से आठ पीढ़ियों के बाद प्रति पीढ़ी 17% अधिक वृद्धि प्राप्त करने वाली उन्नत रोहू (जयंती) विकसित की गई।

  • मीठे पानी की जलीय कृषि में एक दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण मत्स्य प्रजातियों जैसे कार्प (Labeo calbasu, L. fimbriatus, L. gonius, L. bata, L. dyocehillus, Cirrhinus reba, आदि), कैटफिश (Clarias magur, Ompok pabda, O. bimaculatus, Horabagrus brachysoma, आदि), अन्य विविध प्रजातियों (Channa striatus, Anabas testudineus, Chitala chitala, आदि) और मीठे पानी के झींगों (Macrobrachium rosenbergii और M. malcolmsonii) का प्रजातीय विविधीकरण, जिसमें उनके प्रजनन तथा बीज उत्पादन की कार्यप्रणालियों के पैकेज भी शामिल हैं।

  • ट्राउट (Oncorhynchus mykiss, Schizothorax richardsonii) और महसीर (Tor putitora, Neolissocheilus hexagonolepis) सहित महत्वपूर्ण शीतजल प्रजातियों के प्रजनन, बीज उत्पादन और पालन की प्रौद्योगिकी विकसित की गई।

  • मिल्कफिश (Chanos chanos), पर्लस्पॉट (Etroplus suratensis), एशियन सीबास (Lates calcarifer), कोबिया (Rachycentron canadum) और सिल्वर पोम्पानो (Trachinotus blochii) आदि जैसी महत्वपूर्ण खारे पानी और समुद्री फिनफिश के प्रजनन, बीज उत्पादन और पालन की प्रौद्योगिकी।

  • तटीय तथा अंतर्देशीय लवणीय क्षेत्रों में वाणिज्यिक समुद्री झींगा पालन के लिए ग्रो-आउट उत्पादन प्रौद्योगिकी।

  • डैमसेल और क्लाउन फिश सहित महत्वपूर्ण समुद्री सजावटी मछलियों के ब्रूडस्टॉक विकास, प्रजनन और लार्वा पालन की प्रौद्योगिकी।

  • वाणिज्यिक और संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण 30 से अधिक मत्स्य प्रजातियों के लिए मिल्ट क्रायोप्रिजर्वेशन प्रोटोकॉल।

  • महत्वपूर्ण फिनफिश, मीठे पानी के झींगों, समुद्री झींगों और सजावटी मत्स्य प्रजातियों के विभिन्न जीवन चरणों के लिए आहार विकसित किए गए और उनका व्यावसायीकरण किया गया (जैसे, सीबास के लिए Bhetkiahar, L. Vannamei के लिए Vannamei+)।

  • महत्वपूर्ण रोगजनकों एवं सीमापार रोगों के लिए प्रतिरक्षाविज्ञानी तथा आणविक निदान विकसित किए गए तथा रोग नियंत्रण के लिए चिकित्सीय और रासायनिक फॉर्मूलेशन विकसित किए गए (जैसे EUS के लिए CIFAX, मीठे पानी की सजावटी मछलियों के सामान्य जीवाणु और फंगल संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए CIFACURE)।

  • जलीय पशु रोगों के लिए राष्ट्रीय निगरानी कार्यक्रम (NSPAAD) के माध्यम से जलीय कृषि प्रणालियों में रोग निगरानी, जिसमें भारत के 15 राज्यों और एक केन्द्र शासित प्रदेश (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, असम, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, बिहार और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह) में 24 संगठन शामिल हैं और 100 से अधिक जिलों को कवर किया गया है।

  • पेन कल्चर के माध्यम से बील/आर्द्रभूमियों में मत्स्य उत्पादन को 100-200 किग्रा/हैक्टर/वर्ष से बढ़ाकर 1000 किग्रा/हैक्टर/वर्ष किया गया।

  • 600 से अधिक मत्स्य और शेलफिश प्रजातियों की डीएनए बारकोडिंग।

  • वाणिज्यिक तथा संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण 30 से अधिक फिनफिश एवं शेलफिश प्रजातियों के आनुवंशिक स्टॉक का लक्षण-वर्णन।

  • 3436 फिनफिश (स्वदेशी और विदेशी दोनों) के लिए डेटाबेस विकसित किया गया।

  • मीठे पानी और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों से 50 नई मत्स्य प्रजातियों का वर्णन।

  • भारतीय समुद्री क्षेत्र के मत्स्य स्टॉक का आकलन और मत्स्य उत्पादन डेटाबेस तैयार किया गया।

  • समुद्री और मीठे पानी की प्रणालियों में महत्वपूर्ण मत्स्य प्रजातियों के केज कल्चर की प्रौद्योगिकियां विकसित और प्रदर्शित की गईं।

  • नई पीढ़ी के ईंधन-कुशल और बहुउद्देशीय मत्स्य जहाजों के डिजाइन विकसित किए गए।

  • ट्रॉल के लिए बायकैच रिडक्शन डिवाइस (BRDs), जुवेनाइल फिश एक्सक्लूडर एंड श्रिम्प सॉर्टिंग डिवाइस (JFE-SSD) और टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TED) विकसित किए गए।

  • कम मूल्य वाली मछलियों से एक्सट्रूडेड उत्पाद, बैटर्ड और ब्रेडेड उत्पाद, स्मोक्ड उत्पाद, फिश अचार, रेडी-टू-सर्व मत्स्य उत्पाद, विशेष उत्पाद और थर्मल प्रोसेस्ड उत्पाद सहित अनेक मूल्य संवर्धित मत्स्य उत्पाद तथा क्रस्टेशियन अपशिष्ट से चिटिन और चिटोसन जैसे औद्योगिक उत्पाद विकसित किए गए।

  • जलीय संसाधनों से Calcifat, Chitone, Opex, ग्रीन एल्गल एक्सट्रैक्ट और ग्रीन मसल एक्सट्रैक्ट तथा PUFA जैसे न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद विकसित किए गए।

  • मत्स्य पालन के महत्व वाले उपकरणों और गैजेट्स जैसे मैकेनिकल पॉन्ड न्यूट्रिएंट एप्लीकेटर आदि तथा मछली के स्वच्छ संरक्षण के लिए पर्यावरण-अनुकूल हाइब्रिड सोलर ड्रायर का डिजाइन एवं विकास किया गया।

  • जलीय कृषि और मत्स्य पालन के विभिन्न विषयों में स्नातकोत्तर (पीजी और पीएच.डी. दोनों) कार्यक्रमों के माध्यम से मानव संसाधन विकास तथा आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से मछुआरों, मत्स्य किसानों, मत्स्य अधिकारियों और उद्यमियों का क्षमता निर्माण।

  • मत्स्य पालन और जलीय कृषि से संबंधित नीतिगत मुद्दों के निर्धारण के लिए भारत सरकार को परामर्श सहायता प्रदान करना।

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