भाकृअनुप के दो डीम्ड विश्वविद्यालयों की क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (विषयवार) 2026 में ऐतिहासिक शुरुआत
27 मार्च, 2026, नई दिल्ली
विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारतीय कृषि संस्थानों ने विषय के अनुसार क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में पहली बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है, क्योंकि दिसंबर 2025 में आयोजित मुख्य सचिवों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कुशल मानव संसाधन के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया था।
इस राष्ट्रीय प्राथमिकता के अनुरूप, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत, राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान, शिक्षा एवं विस्तार प्रणाली (एनएआरईईएस) में विश्वस्तरीय, बहुविषयक और अनुसंधान-प्रधान शिक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यूके स्थित विश्लेषण संस्था क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स द्वारा 25 मार्च को जारी नवीनतम रैंकिंग इन प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। 2026 संस्करण में 1,900 से अधिक विश्वविद्यालयों के 21,000 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रमों का मूल्यांकन किया गया, जिसमें शैक्षणिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता प्रतिष्ठा, शोध उद्धरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मानदंड शामिल थे।

पहली बार, भाकृअनुप के दो संस्थानों ने इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर स्थान प्राप्त किया है। आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली, ने वेटरनरी साइंस श्रेणी में 51–100 रैंक बैंड में स्थान हासिल किया, और शीर्ष 100 में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय विश्वविद्यालय बना।
वहीं, आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली, ने कृषि एवं वानिकी श्रेणी में 151–200 बैंड में अपनी शुरुआत की, और भारत के चुनिंदा संस्थानों के समूह में शामिल हुआ।
एग्रीकल्चर एवं फॉरेस्ट्री श्रेणी में कुल 475 वैश्विक संस्थानों में से 10 भारतीय विश्वविद्यालय शामिल हुए। आईएआरआई के साथ 151–200 बैंड में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर भी शामिल हैं, जबकि तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय 201–250 बैंड में है। उल्लेखनीय रूप से, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने भी 301–350 बैंड में पहली बार प्रवेश किया।

डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने कहा कि भाकृअनुप के डीम्ड विश्वविद्यालयों की यह उपलब्धि कृषि-खाद्य और स्वास्थ्य प्रणालियों में बुनियादी और अनुप्रयुक्त विज्ञान के क्षेत्र में उनके बहुआयामी योगदान का प्रमाण है। वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कृषि विज्ञान परिदृश्य में यह सफलता विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जहां संस्थानों का मूल्यांकन केवल शोध उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव के आधार पर भी किया जाता है। भाकृअनुप-आईएआरआई और भाकृअनुप-आईवीआरआई का उत्कृष्ट प्रदर्शन उनके समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें बुनियादी अनुसंधान, अनुप्रयुक्त विज्ञान, और क्षेत्रीय स्तर पर विस्तार कार्य शामिल हैं। साथ ही, फसल एवं पशुधन सुधार तथा जलवायु-सहिष्णु कृषि के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में उनका महत्वपूर्ण योगदान भी उल्लेखनीय है। मजबूत पूर्व छात्र नेटवर्क और हितधारकों का विश्वास भी उनकी वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करने में सहायक रहा है।
जैसे-जैसे भारत विकसित भारत की ओर अग्रसर है, भाकृअनुप के प्रमुख संस्थानों को मिली यह वैश्विक मान्यता एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है, जहां देश की कृषि उच्च शिक्षा न केवल वैश्विक स्तर के साथ कदम से कदम मिला रही है, बल्कि विज्ञान, नवाचार और मानव संसाधन विकास में उत्कृष्टता के नए मानक भी स्थापित कर रही है।
(स्रोत: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली)







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