25 जुलाई, 2026, अल्मोड़ा
भाकृअनुप नई दिल्ली की गवर्निंग बॉडी के सम्मानित सदस्य एवं जड़ी-बूटी सलाहकार समिति, उत्तराखंड के माननीय उपाध्यक्ष (दर्जा राज्य मंत्री स्तर) श्री भुवन विक्रम डबराल ने भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हवालबाग, अल्मोड़ा परिसर का आज भ्रमण कर संस्थान के अनुसंधान एवं प्रसार कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

भ्रमण के दौरान श्री डबराल ने दलहन, तिलहन एवं मक्का की उन्नत प्रजातियों, मधुमक्खी पालन, परागण शोध, प्राकृतिक खेती, दीर्घकालीन पोषक तत्व प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी प्राप्त कर किसानों को मिलने वाले लाभों की जानकारी ली। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत ने एक प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण के माध्यम से संस्थान द्वारा विगत 5 वर्षों में पर्वतीय कृषि के उत्थान में दिए गए ऐतिहासिक योगदान का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
श्री डबराल ने संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ विकसित तकनीकें और नई प्रजातियाँ किसानों को कम समय में बेहतर उत्पादन और अधिक आय दिलाने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन कृषि मशीनों की प्रशंसा की, जो पर्वतीय क्षेत्रों की माताओं और बहनों के पारंपरिक श्रमसाध्य कार्यों को सुलभ बनाकर उनके समय, श्रमशक्ति और शारीरिक कष्ट को कम कर रही हैं।

इस अवसर पर उपस्थित भारतीय किसान संघ, उत्तराखंड के महामंत्री, श्री कुँवर पाल सिंह ने भी संस्थान की तकनीकों को किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने वाला बताया। उन्होंने भविष्य में कृषकों को अधिक संख्या में संस्थान के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सम्मिलित करवाये जाने हेतु अनुरोध भी किया, इस विषय पर संस्थान के निदेशक ने सहमति जताते हुए स्पष्ट किया कि संस्थान प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है साथ ही इसके लिए उनके साथ पूर्ण सहयोग करने को तैयार है।
इससे पूर्व संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा भारतीय ने जानकारी दी कि दलहन एवं तिलहन परियोजनाओं के अंतर्गत संस्थान द्वारा अब तक 40 से अधिक उन्नत किस्मों का विकास किया जा चुका है और वर्तमान में संस्थान अरहर की एक ऐसी नई प्रजाति पर कार्य कर रहा है, जो मात्र 120 दिनों में परिपक्व हो जाएगी।

वहीं, मक्का प्रजनक प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेश खुल्बे ने अवगत कराया कि बीते पाँच वर्षों में मक्का की 6 से अधिक जैव संवर्धित प्रजातियाँ विकसित की गई हैं, जिनमें सामान्य मक्का की तुलना में दोगुनी गुणवत्ता वाला प्रोटीन है और इनकी उपज 55 कुंतल प्रति हैक्टर तक दर्ज की गई है।
इस पूरे भ्रमण कार्यक्रम का समन्वयन प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. बृज मोहन पांडेय द्वारा किया गया।
(स्रोतः भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा)







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