15 सितंबर, 2026, वायनाड, केरलम
भाकृअनुप–राष्ट्रीय पशु पोषण एवं शरीर क्रिया विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु ने पशुधन प्रबंधन प्रशिक्षण केन्द्र (एलएमटीसी), सुल्तान बथेरी के सहयोग से आज वायनाड, केरलम के एपीसीओएस थरियोड सम्मेलन हॉल में किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों के किसानों तक वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन पद्धतियों और प्रौद्योगिकियों को पहुंचाने के उद्देश्य से जीनोम एडिटिंग परियोजना निधि के सहयोग से डीएपीएससी/एसटी पहलों के अंतर्गत भाकृअनुप-एनआईएएनपी की प्रसार पहलों के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम ने वैज्ञानिक डेयरी फार्मिंग, संतुलित पोषण, प्रजनन स्वास्थ्य और टिकाऊ पशुधन प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधे संवाद के लिए एक मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन केरल पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (केवीएएसयू) के कुलसचिव डॉ. सबिन जॉर्ज ने किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अर्थबंधु साहू, निदेशक, भाकृअनुप-एनआईएएनपी, ने पशुधन उत्पादकता बढ़ाने के लिए संतुलित पोषण, वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन और बेहतर प्रजनन पद्धतियों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को पशु स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार के लिए उपयुक्त एनआईएएनपी प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन पर तकनीकी साहित्य भी जारी किया गया। पशुधन सहायता पहल के तहत भाग लेने वाले किसानों के बीच पशु आहार, रबर मैट, फीड चार्ट और फर्टिमिन प्लस सप्लीमेंट वितरित किए गए।
डॉ. अजी आर., जिला पशुपालन अधिकारी तथा श्री वर्गीज जॉर्ज, उप निदेशक, डेयरी विकास विभाग, ने किसानों के साथ संवाद किया साथ ही वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन पद्धतियों एवं उन्हें उपलब्ध विभागीय सहायता के महत्व पर प्रकाश डाला।

“डेयरी पशुओं का इष्टतम पोषण प्रबंधन” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान में पशु स्वास्थ्य बनाए रखने और उत्पादकता में सुधार के लिए संतुलित आहार की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। इसके बाद भाकृअनुप-एनआईएएनपी के वैज्ञानिकों द्वारा “डेयरी मवेशियों में प्रजनन संबंधी समस्याएं और प्रजनन क्षमता प्रबंधन” विषय पर एक विशेषज्ञ सत्र आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने डेयरी मवेशियों में प्रमुख प्रजनन संबंधी चुनौतियों और प्रजनन स्वास्थ्य एवं प्रजनन क्षमता में सुधार के वैज्ञानिक उपायों पर चर्चा की।
किसानों को उचित पोषण और प्रजनन प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने तथा वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन के हिस्से के रूप में फर्टिमिन प्लस और फीड चार्ट सहित एनआईएएनपी प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में लगभग 73 अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के डेयरी एवं पशुधन किसानों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय पशु पोषण एवं शरीर क्रिया विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु)







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