भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने 122वां स्थापना दिवस का किया आयोजन

भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने 122वां स्थापना दिवस का किया आयोजन

1 अप्रैल, 2026, नई दिल्ली

भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली, ने आज डॉ. बी.पी. पाल सभागार में अपना 122वां स्थापना दिवस उत्साह, गरिमा एवं राष्ट्रीय विकास के लिए कृषि विज्ञान को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ मनाया।

यह अवसर भाकृअनुप–आईएआरआई के एक शताब्दी से अधिक समय के उन अग्रणी योगदानों का स्मरण था, जिन्होंने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार के माध्यम से भारत की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है।

ICAR–IARI Commemorates its 122nd Foundation Day

मुख्य अतिथि रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री, दिल्ली ने भाकृअनुप–आईएआरआई के कृषि सततता और किसानों की आजीविका में अमूल्य योगदान की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने “हरित दिल्ली” के निर्माण और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने में व्यक्तिगत जिम्मेदारी और संस्थागत प्रयासों के महत्व पर जोर देते हुए वैज्ञानिक हस्तक्षेप और जागरूकता के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य सुधार की आवश्यकता बताई।

ICAR–IARI Commemorates its 122nd Foundation Day

उन्होंने किसानों के समर्थन में भाकृअनुप–आईएआरआई की भूमिका को भी रेखांकित किया और विकसित भारत के सपने को साकार करने में इसके योगदान की सराहना की, साथ ही लाल बहादुर शास्त्री के खाद्य आत्मनिर्भरता संबंधी दृष्टिकोण को याद किया।

श्री रविंदर सिंह (इंद्राज), सामाजिक कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण, सहकारिता एवं चुनाव मंत्री ने भी इस अवसर पर शुभकामनाएं दीं और हरित दिल्ली के निर्माण हेतु सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

ICAR–IARI Commemorates its 122nd Foundation Day

मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, सचिव, कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अपने संबोधन में उन्होंने शहरी और परि-शहरी कृषि चुनौतियों से निपटने हेतु भाकृअनुप और दिल्ली सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने अपशिष्ट को उर्वरक में बदलने जैसे नवाचारी समाधान अपनाने का सुझाव दिया तथा मानव संसाधन विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए भोजन को “औषधि” के रूप में वर्णित किया।

डॉ. जाट ने किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया और फसल प्रणाली में डीएपी उर्वरक के संतुलित उपयोग की सलाह दी, जिससे लागत में बचत एवं पोषक तत्व उपयोग दक्षता में वृद्धि संभव है।

स्वागत संबोधन देते हुए डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव ने पिछले वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों और पहलों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आईएआरआई ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क 2025 में लगातार तीसरी बार प्रथम स्थान प्राप्त किया, एसडीजी में दूसरा स्थान, समग्र रूप से 24वां तथा अनुसंधान में 29वां स्थान प्राप्त किया। संस्थान को राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड से A+ (3.64/4.00) मान्यता (2025–2030) प्राप्त हुई तथा क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में 151–200 बैंड में स्थान मिला।

मुख्यमंत्री ने पूसा संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और “खाद्य, पोषण और आजीविका सुरक्षा के लिए उन्नत फसल किस्में” तथा “सटीक फूलों की खेती और लैंडस्केप डिजाइन” शीर्षक पुस्तकों का लोकार्पण भी किया।

इस अवसर पर वर्ष 2025–26 के दौरान उत्कृष्ट योगदान के लिए वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मचारियों, प्रशासनिक एवं वित्तीय कर्मियों तथा मीडिया प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे डॉ. आर.एन. पडारिया, संयुक्त निदेशक (विस्तार), भाकृअनुप–आईएआरआई ने प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी गणमान्य अतिथियों, आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस कार्यक्रम में भाकृअनुप–आईएआरआई के पूर्व निदेशकों सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।

भाकृअनुप–आईएआरआई के 122वें स्थापना दिवस समारोह ने संस्थान की गौरवशाली विरासत को प्रतिबिंबित किया एवं वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार तथा किसान-केंद्रित विकास के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया, जो भारत के लिए एक सतत और समृद्ध कृषि भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

×