24 जुलाई, 2026, अल्मोड़ा
भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हवालाबाग, अल्मोड़ा ने अपने प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र में 22 से 24 जुलाई 2026 तक "औषधीय मशरूम खेती" पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के मार्गदर्शन में किया गया।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्राम विकास विभाग, अल्मोड़ा द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बटन, ऑयस्टर (प्लुरोटस) और औषधीय मशरूम की वैज्ञानिक खेती में किसानों के ज्ञान और व्यावहारिक कौशलों को सुदृढ़ करना था। उल्लेखनीय है कि यह प्रशिक्षण मुख्य विकास अधिकारी, अल्मोड़ा, श्री रामजी शरण शर्मा की पहल पर आयोजित किया गया।

अपने उद्घाटन संबोधन में, भाकृअनुप-वि.प.कृ.अनु.सं. के फसल उत्पादन प्रभाग के प्रमुख डॉ. बृज मोहन पांडे ने किसानों की तकनीकी दक्षता में सुधार के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि वैज्ञानिक मशरूम खेती विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में आय सृजन, उद्यमिता विकास और आजीविका सुरक्षा के अपार अवसर प्रदान करती है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण का सर्वोत्तम उपयोग करने और क्षेत्रीय स्तर पर तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रतिभागियों और गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए, प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. गौरव वर्मा ने ग्रामीण आजीविका, पोषण सुरक्षा और कृषि आय को बढ़ाने के लिए एक टिकाऊ उद्यम के रूप में मशरूम की खेती के बढ़ते महत्व पर जोर दिया।

तकनीकी सत्रों में कंपोस्टिंग तकनीक, गैनोडर्मा, शिटाके और कॉर्डिसेप्स सहित औषधीय मशरूम की खेती की तकनीक, मशरूम स्पॉन उत्पादन, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां, रोग एवं कीट प्रबंधन, मशरूम के औषधीय व पोषण संबंधी गुण, और कंपोस्टिंग तथा उपज बढ़ाने में सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर व्याख्यान और व्यावहारिक प्रदर्शन शामिल थे। विशेषज्ञों ने मशरूम उद्यमों की लाभप्रदता में सुधार के लिए मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन पर भी सत्र आयोजित किए।
कृषक-वैज्ञानिक संवाद के दौरान, प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और कार्यक्रम पर संतोष व्यक्त किया। किसानों ने प्रशिक्षण के व्यावहारिक स्वरूप की सराहना की और कहा कि इसने अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में मशरूम की खेती को अपनाने के लिए उनके ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास को काफी बढ़ाया है।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए, डॉ. लक्ष्मी कान्त ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और व्यावहारिक कौशल का उपयोग मशरूम आधारित उद्यमों की स्थापना करने और अपनी आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने में करें।
डॉ. पी.के. मिश्रा ने प्रतिभागियों को मशरूम की खेती को एक स्थायी आय-सर्जक गतिविधि के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया और उन्हें संस्थान से निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में अल्मोड़ा जिले के दस विकास खंडों का प्रतिनिधित्व करने वाली कुल 29 महिला कृषकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का सफल समन्वय डॉ. पी.के. मिश्रा, डॉ. गौरव वर्मा तथा डॉ. रमेश सिंह पाल द्वारा और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पी. के. मिश्रा द्वारा किया गया।
(स्रोतः भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा)








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