Stakeholder Meeting on Reducing Fertilizer Usage in Meghalaya at ICAR RC NEH, Umiam, Meghalaya

Stakeholder Meeting on Reducing Fertilizer Usage in Meghalaya at ICAR RC NEH, Umiam, Meghalaya

26 मई, 2026, मेघालय

भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र (आरसी एनईएच), उमियाम, ने आज “कृषि में उर्वरकों के उपयोग की वर्तमान स्थिति और मेघालय में इसके प्रयोग को कम करने की रणनीतियाँ” विषय पर एक हितधारक बैठक आयोजित की। इस बैठक में मेघालय सरकार के कृषि एवं बागवानी विभाग के वरिष्ठ एवं मध्य स्तर के अधिकारी, क्षेत्रीय विस्तार कार्यकर्ता, कृषि आदान विक्रेता, केवीके कार्मिक, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) तथा किसान शामिल हुए।

श्री डॉन सोहलिया, सहायक कृषि निदेशक (उर्वरक), मेघालय सरकार, ने मेघालय में उर्वरकों की वर्तमान स्थिति पर प्रस्तुति दी।

डॉ. जी. कादिरवेल, निदेशक, भाकृअनुप आरसी एनईएच, उमियाम, ने बैठक के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उर्वरकों के उपयोग को न्यूनतम करने से किसानों पर आर्थिक बोझ कम होगा तथा सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि यद्यपि मेघालय में उर्वरकों की खपत कई अन्य राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है, फिर भी इसकी खपत को और कम करने तथा उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति हितधारकों को जागरूक करने की आवश्यकता है।

डॉ. मोहंती, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, ने उर्वरकों के उपयोग को कम करने के विकल्प के रूप में हरी खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के विकास की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। यह भी चर्चा की गई कि संतुलित उर्वरीकरण सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को उर्वरकों की मांग इस प्रकार प्रस्तुत करनी चाहिए कि किसानों को आवश्यक मात्रा में और सही समय पर कृषि आदान उपलब्ध हो सकें।

Stakeholder Meeting on Reducing Fertilizer Usage in Meghalaya at ICAR RC NEH, Umiam, Meghalaya

बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने पिछले वर्ष के दौरान मौसम एवं फसल-वार उर्वरक उपयोग के पैटर्न, मेघालय में भविष्य की उर्वरक एवं खाद आवश्यकताओं तथा इनके व्यवस्थित दस्तावेजीकरण की आवश्यकता सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

चर्चा का केन्द्र उर्वरकों के उपयोग को कम करने के वैकल्पिक उपायों पर भी रहा, जिनमें जैव-उर्वरकों, जैव-एजेंटों, हरी खाद, अपशिष्ट से तैयार जैविक खाद, बायोगैस उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट, प्राकृतिक खेती के लिए पारंपरिक तरल जैव-फॉर्मुलेशनों, फसल चक्र, दलहनी फसलों के साथ अंतरफसल प्रणाली आदि को बढ़ावा देना शामिल है।

लाइन विभाग के अधिकारियों ने किसानों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रत्येक जिले में जैव-उर्वरक उत्पादन प्रणालियों को सुदृढ़ करने के महत्व पर जोर दिया। साथ ही उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक रणनीतियाँ तैयार करने पर भी बल दिया गया।

यह हितधारक बैठक विभिन्न हितधारकों के बीच संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई, जिसके माध्यम से मेघालय में उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने तथा उनके प्रयोग को कम करने के लिए व्यवहार्य रणनीतियों की पहचान की गई।

(स्रोत: भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र, उमियाम, मेघालय)

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