‘स्वदेशी सजावटी क्षमता का दोहन: पोस्ट कोविड-19 महामारी’ पर हुआ राष्ट्रीय वेबिनार

18 जून, 2020, नई दिल्ली

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के बागवानी विज्ञान प्रभाग और भाकृअनुप-पुष्प विज्ञान अनुसंधान निदेशालय, पुणे, महाराष्ट्र ने आज 'स्वदेशी सजावटी क्षमता का दोहन: पोस्ट कोविड-19 महामारी' पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया।  

National Webinar on “Harnessing the Potential of Indigenous Ornamentals: Post COVID-19 Pandemic”  National Webinar on “Harnessing the Potential of Indigenous Ornamentals: Post COVID-19 Pandemic”

मुख्य अतिथि, डॉ. आनंद कुमार सिंह, उप महानिदेशक (बागवानी विज्ञान), भाकृअनुप ने स्वदेशी सजावटी को लोकप्रिय बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में सूचनाओं के दस्तावेजीकरण, विशेषता और प्रकाशन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। डॉ. सिंह ने फूलों की खेती करने वाले समूह को कम-से-कम 50 देशी प्रजातियों की पहचान करने की सलाह दी ताकि उन्हें व्यावसायीकरण के अगले स्तर तक लाया जा सके। उन्होंने ऑर्किड में विशाल जैव विविधता की रक्षा और उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए उपलब्ध जीनोम संसाधन उपकरणों का उपयोग करके सिक्किम में ऑर्किड की व्यवस्थित रूप से चिह्नित करने का आग्रह किया।

सम्मानित अतिथि, डॉ. टी. जानकीराम, अतिरिक्त महानिदेशक, (बागवानी विज्ञान), भाकृअनुप ने 3सी का उदाहरण देते हुए स्वदेशी सजावटी के संरक्षण, संवर्धन और व्यवसायीकरण का आग्रह किया। डॉ. जानकीराम ने देशी पौधों के लिए विशेष नर्सरी विकसित करने या नर्सरी में अलग सेक्शन बनाने की आवश्यकता की वकालत की। उन्होंने स्कूली छात्रों के पाठ्यक्रम में स्वदेशी सजावटी संबंधी अध्यायों को शामिल करने, पीजी और डॉक्टरेट छात्रों को अनुसंधान विषयों का आवंटन करने और मूल्य वर्धित उत्पादों वाले हवाई अड्डों और मॉल में स्टॉल स्थापित करने के लिए स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने जैसे कुछ उपायों का भी सुझाव दिया।

विभिन्न संगठनों द्वारा किए गए अनुसंधान और विकास के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. के. वी. प्रसाद, निदेशक, भाकृअनुप-डीएफआर ने समर्पित उत्पादन केंद्रों की पहचान करने, उन्हें मजबूत करने, विभिन्न बाजारों तक पहुँचने के लिए एक मूल्य श्रृंखला बनाने और स्वदेशी सजावटी की ब्रांडिंग करने पर जोर दिया।

जेएनटीबीजीआरआई, भाकृअनुप-डीएफआर, भाकृअनुप-आईएआरआई, भाकृअनुप-सीआईएआरआई, भाकृअनुप-सीआईएएच, भाकृअनुप-एनआरसी ऑन ऑर्किड, केयू, बीएचयू और डॉ. वाईएसपीयूएचएंडएफ से आए प्रख्यात वक्ताओं ने हिमालय, पश्चिमी घाट, गंगेंटिक मैदानों, शुष्क क्षेत्रों, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और आर्किड्स ऑफ इंडिया के स्वदेशी सजावटी में अनुसंधान और विकास पहलों पर प्रकाश डाला।

लगभग 740 प्रतिभागियों ने वेबिनार में अपनी भागीदारी दर्ज की।

(स्रोत: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली का बागवानी विज्ञान प्रभाग)