‘राजस्थान में किसानों की समृद्धि के लिए प्रौद्योगिकीय नवोन्मेष तथा रणनीतियाँ’ पर विचार-मंथन सत्र का हुआ आयोजन

13 जुलाई, 2019, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर

प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन प्रभाग, भाकृअनुप, नई दिल्ली ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में स्थित सी. सुब्रमण्यम सभागार में आज एक दिवसीय कार्यक्रम ‘राजस्थान में किसानों की समृद्धि के लिए प्रौद्योगिकीय नवोन्मेष तथा रणनीतियाँ’ पर विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया।

Brainstorming Session on Technological Innovations and Strategies for Farmers’ Prosperity in Rajasthan organized   Brainstorming Session on Technological Innovations and Strategies for Farmers’ Prosperity in Rajasthan organized

श्री कैलाश चौधरी, राज्य मंत्री, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राजस्थान का कृषक समुदाय आरंभ से ही पानी की समस्या से जूझता रहा है। तमाम चुनौतियों के बावजूद वहाँ के किसानों ने कृषि क्षेत्र में अनुपम उपलब्धियाँ हासिल की हैं। कार्यक्रम में बुलाए गए चयनित किसानों से उन्होंने आग्रह किया कि वे अपने शुरुआती कृषि अवस्था से पद्मश्री पाने तक के सफर को आज के सत्र में साझा करें ताकि नई आने वाली पीढ़ी भी इस क्षेत्र में अपना योगदान दे पाएँ।

Brainstorming Session on Technological Innovations and Strategies for Farmers’ Prosperity in Rajasthan organized  Brainstorming Session on Technological Innovations and Strategies for Farmers’ Prosperity in Rajasthan organized

मंत्री ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी एक राज्य की कृषि-संबंधी चुनौतियों के समाधान हेतु कृषि-वैज्ञानिकों, छात्रों, नीति-निर्धारकों, अधिकारियों और किसानों को एक मंच पर लाया गया है। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में हम ऐसे कार्यक्रम श्रृंखलाबद्ध तरीके से दूसरे अन्य राज्यों के लिए भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए प्रधानमंत्री द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की पहुँच किसानों तक आसानी से होनी चाहिए, ताकि वो लाभ उठा पाएँ। ऐसी स्थिति में हम 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने में सक्षम हो पाएंगे। मंत्री ने कहा कि कृषक समुदाय का विकास तभी संभव है जब आनेवाले दिनों में अपने फसल की कीमत वो खुद तय तय करें, न कि मंडी के व्यापारी।

Brainstorming Session on Technological Innovations and Strategies for Farmers’ Prosperity in Rajasthan organizedडॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने कहा कि किसी एक राज्य के लिए बड़े पैमाने पर पहली बार ऐसा कार्यक्रम किया जा रहा है जो कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक हस्तक्षेप है। इस कार्यक्रम की पहल और इसके दिशा-निर्देशों के लिए महानिदेशक ने मंत्री जी की सराहना की और उम्मीद जताई कि भविष्य में दूसरे राज्यों के लिए भी ऐसे कार्यक्रम किए जाएँ।

डॉ. महापात्र ने कहा कि कृषि से संबंधित तमाम चुनौतियों के समाधान हेतु नीति-निर्धारकों, कृषि-वैज्ञानिकों, छात्रों, किसानों और विशेषज्ञों का एक मंच पर आना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद शुरुआत से ही कृषक समुदाय की उन्नति के लिए आवश्यकताजनित प्रौद्योगिकी का विकास करता रहा है। उन्होंने राजस्थान में कार्यरत विभिन्न भाकृअनुप-संस्थानों, क्षेत्रीय स्टेशनों आदि की ओर ध्यान दिलाते हुए पानी की समस्या के निवारण हेतु भाकृअनुप-काजरी की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने राजस्थान के किसानों से बागवानी और पशुपालन के लिए भी आग्रह किया। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों की रूपरेखा के बारे में विस्तार से बताते हुए अंत में उन्होंने कार्यक्रम के सफलतापूर्वक समापन की आशा व्यक्त की। 

श्री सुशील कुमार, अतिरिक्त सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं सचिव (भा.कृ.अनु.प.) ने राजस्थान में पानी की समस्या को रेखांकित किया और पानी को संरक्षित करने के लिए कैम्पेन करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि भाकृअनुप कृषि क्षेत्र में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों ही स्तरों पर कार्य करता है। उन्होंने राजस्थान के कृषक समुदाय को प्रौद्योगिकी और व्यवसाय से जोड़ने के लिए भाकृअनुप के प्रयासों की सराहना की।

डॉ. के. अलगुसुंदरम, उप महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी) ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए राजस्थान की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मजबूती को सिलसिलेवार ढंग से बताया। उन्होंने कहा कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में राजस्थान के कृषि क्षेत्र की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

डॉ. आर. एस. परोदा, अध्यक्ष, टास, नई दिल्ली ने हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और नीली क्रांति से लेकर कृषि में आत्मनिर्भर होने तक के सफर को विस्तार से बताया। उन्होंने राजस्थान में व्याप्त कृषि संबंधी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि राजस्थान के कृषि क्षेत्र में पशुओं की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने पारंपरिक खेती को नवीन खेती में तब्दील करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कृषि उपज से कृषि व्यवसाय तक की बात करते हुए युवाओं को कृषि क्षेत्र से जुडने का आग्रह किया। उन्होंने आवश्यकताजनित कृषि प्रौद्योगिकी और संरक्षित खेती पर ज़ोर दिया।

इस कार्यक्रम में संसद-सदस्यों, भाकृअनुप-संस्थानों के अधिकारियों, निदेशकों, वैज्ञानिकों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, छात्रों, नीति-निर्धारकों सहित राजस्थान के 44 केवीके से चयनित 300 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

(स्त्रोत: भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय)