‘बदलती जलवायु के तहत खारे वातावरण में अनुकूल कृषि’ पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का हुआ आयोजन

3 नवंबर, 2020, करनाल

भाकृअनुप-केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल, हरियाणा ने इंटरनेशनल सेंटर फॉर बायोसलाइन एग्रीकल्चर (आईसीबीए) के सहयोग से आज ‘बदलती जलवायु के तहत खारे वातावरण में अनुकूल कृषि’ पर एक अंतरराष्ट्रीय लवणता वेबिनार का आयोजन किया।

 

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) ने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक और जलवायु परिवर्तन प्रक्रियाओं के अलावा सिंचाई का अधिक उपयोग और भूमि उपयोग के बदलते तरीके, नमक प्रभावित भूमि के तहत खेती योग्य भूमि के लिए प्रमुख संचालक हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रमुख नदी घाटियों में सिंचाई के कारण होने वाले लवणता प्रेरित तनावों की घटना देखी गई है।

डॉ. इस्माहाने इलाउफी, महानिदेशक, इंटरनेशनल सेंटर फॉर बायोसलाइन एग्रीकल्चर, दुबई ने वर्तमान महामारी कोविड-19 पर जोर देते हुए कहा कि इसने सामान्य रूप से कृषि और विशेष रूप से एशियाई क्षेत्र में लवणता को प्रभावित करने वाले प्राकृतिक और मानव निर्मित कारकों को जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति प्रमुख खाद्य फसलों द्वारा मोनो-क्रॉपिंग के बजाय सीमांत क्षेत्रों में कम उपयोग वाली फसलों की खोज को फिर से जीवंत बनाने के लिए मांग करती है।

डॉ. एस. के. चौधरी, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भाकृअनुप ने एसएएस के लिए आवश्यक प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्थानीय व क्षेत्रीय पैमानों पर उनका समाधान करने के लिए नीति एवं अभ्यास के स्तरों पर एसएएस के प्राथमिकता वाले मुद्दों को लेने के लिए एक आवश्यक आधारित सहयोगी कार्यक्रम और नेटवर्क की राय दी।

डॉ. पी. सी. शर्मा, निदेशक, भाकृअनुप-सीएसएसआरआई, करनाल, हरियाणा ने भारत में नमक प्रभावित मिट्टी की वर्तमान स्थितियों और संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न प्रौद्योगिकियों के माध्यम से उनके सतत प्रबंधन दृष्टिकोणों का अवलोकन किया।

अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में 967 प्रतिभागियों ने अपनी भागीदारी दर्ज की।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल, हरियाणा)