‘क्षमतावान फसलों में सुधार एवं मूल्य श्रृंखला का विकास’ पर हुआ विचार-मंथन बैठक का आयोजन

20 जून, 2019, नई दिल्ली

क्षमतावान फसलों पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान तंत्र, भाकृअनुप-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, नई दिल्ली ने आज राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर, नई दिल्ली में ‘क्षमतावान फसलों में सुधार एवं मूल्य श्रृंखला का विकास’ पर विचार-मंथन बैठक का आयोजन किया।

Brainstorming Meeting on “Improvement of Potential Crops and Development of Value Chain” organized  Brainstorming Meeting on “Improvement of Potential Crops and Development of Value Chain” organized

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और किसानों द्वारा विकसित फसलों की किस्मों को उचित ब्रांडिंग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक प्रभावी मीडिया नियोजन रणनीति विकसित करने की आवश्यकता है। महानिदेशक ने फसलों की किस्मों का समुचित विश्लेषण करने का आग्रह किया जो प्रभावी ढंग से विशेष फसलों की ब्रांडिंग में मदद कर सके।

फसलों की किस्मों में मूल्य श्रृंखला की प्रणाली पर जोर देते हुए महानिदेशक ने कहा कि यह प्रक्रिया केवल अन्वेषकों और सूचना प्रसारकों के बीच उचित और प्रभावी समन्वय की मदद से संभव है।

डॉ. ए. के. सिंह, उप महानिदेशक (बागवानी विज्ञान), भाकृअनुप, नई दिल्ली ने विभिन्न महत्त्वपूर्ण फसलों की किस्मों के बारे में अपने विचार साझा किए जो हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग हैं। फसल की विविधता का उदाहरण देते हुए डॉ. सिंह ने वैज्ञानिकों से ऐसी तकनीकें विकसित करने का आग्रह किया जो इसके महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य और पोषण मूल्यों को बनाए रखने में मदद कर सकें।

डॉ. एस. के. मल्होत्रा, कृषि आयुक्त, कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग, कृषि भवन, नई दिल्ली ने कहा कि आय, भोजन, पोषण और पर्यावरण संबंधी प्रतिभूतियाँ एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। व्यवस्था में किसी भी प्रकार की बाधा के कारण पूरे चक्र में गड़बड़ी हो सकती है।

डॉ. मल्होत्रा ​​ने ऐसे कृषि भूमि के निर्माण का आग्रह किया जो फसलों को नष्ट करने वाली कीटों की मौजूदगी को असंभव बना सके। उन्होंने किसानों से अपने उत्पादों में मूल्यवर्धन जोड़ने का भी आग्रह किया, ताकि उन्हें अधिक लाभ प्राप्त हो सके।

डॉ. मल्होत्रा ​​ने फसलों के पोषक मूल्यों और स्वास्थ्य लाभ को प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करने के लिए उनकी किस्मों में जैव-सुदृढ़ीकरण के महत्त्व पर जोर दिया।

श्री अश्विनी कुमार, संयुक्त सचिव (बीज) ने फसलों की नई किस्मों की शुरुआत करने का आग्रह किया जो जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। श्री कुमार का मत था कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में इन फसलों को शामिल किया जाए।

डॉ. कुलदीप सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, नई दिल्ली ने इससे पहले अपने स्वागत भाषण में विचार-मंथन बैठक के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ब्यूरो की कार्यशैली, उपलब्धियाँ और भविष्य के लक्ष्यों को भी विस्तार से बताया। डॉ. सिंह ने देश से भूख और गरीबी को खत्म करने के लिए कृषि विविधता की बात करते हुए इन फसलों का उपयोग करने के लिए आग्रह किया।

विचार-मंथन बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न मुद्दों के बारे में विस्तार से चर्चा करना और वैज्ञानिक हस्तक्षेप करना था, ताकि शोधकर्ताओं को मार्ग प्रशस्त किया जा सके जिसके परिणामस्वरूप बेहतर पोषण और उच्च पैदावार के साथ उन्नत किस्मों का विकास संभव हो सके।

(स्रोत: कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय, पूसा परिसर, नई दिल्ली)