'हर मेड़ पर पेड़' विषय पर विचार-मंथन सत्र का हुआ आयोजन

26 अप्रैल, 2021, झाँसी

भाकृअनुप-केंद्रीय कृषिवानिकी अनुसंधान संस्थान, झाँसी, उत्तर प्रदेश ने आज खेत की बाँधों और सीमाओं पर बढ़ते पेड़ों की कमी एवं चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए 'हर मेड़ पर पेड़' पर एक आभासी विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया।

 Brainstorming Session on “Har Med Par Ped” organized

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) ने देश के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में बाँधों और सीमाओं पर उगाई जाने वाली प्रजातियों के चयन पर जोर दिया। उन्होंने उत्पादकता के गुण, पर्यावरणीय सेवाओं और खेत पर उगने वाले पेड़ की सामाजिक-आर्थिक अनिवार्यता को ध्यान में रखने पर जोर दिया।

डॉ. सुरेश कुमार चौधरी, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भाकृअनुप ने वृक्षारोपण के महत्त्व को रेखांकित करते हुए, संबंधित सफलता की कहानियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

डॉ. ए. अरुणाचलम, निदेशक, भाकृअनुप-सीएएफआरआई, झाँसी, उत्तर प्रदेश ने यह बताते हुए चर्चा के दायरे को रेखांकित किया कि देश में हर साल 2.6 मिलियन पेड़ों के रोपण के बदले लगभग 17 लाख पेड़ काटे जाते हैं, जिनमें से अधिकांश वन शासन से बाहर की भूमि में हैं।

कृषि परिदृश्य में बाँधों का परिवर्तनीय आकार एवं प्रकृति, भूमि कार्यकाल एवं बाँधों पर स्वामित्व के मुद्दे, कृषि-पारिस्थितिक विकल्प, बाँधों एवं सीमाओं पर पेड़ों का प्रबंधन और गुणवत्ता रोपण सामग्री की उपलब्धता कुछ बाधाएँ थीं, जिनकी पहचान सत्र के दौरान की गई थी।

विशेषज्ञों ने 28 जून को देशव्यापी वृक्षारोपण दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया, जिसके तहत प्रत्येक नागरिक को एक वर्ष में कम से कम एक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और इसके घटक अनुसंधान संस्थानों के प्रमुख वैज्ञानिकों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएफआरई संस्थानों में कृषि वानिकी पर आईसीएआर की अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना से जुड़े संकायों/वैज्ञानिकों, राज्य के वन विभाग, उद्योग और प्रगतिशील किसानों के प्रतिनिधियों ने भी इस सत्र में भाग लिया।

(स्त्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय कृषिवानिकी अनुसंधान संस्थान, झाँसी, उत्तर प्रदेश)