श्री राधा मोहन सिंह ने किया पुनः संयोजक एलिसा किट जारी

9 जनवरी, 2018, कृषि भवन, नई दिल्ली

श्री राधा मोहन सिंह, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने आज यहाँ भाकृअनुप-राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार द्वारा विकसित – ग्लैंडर्स (अश्व का एक छूत का रोग) के लिए एक और अन्य इक्वाइन (अश्व संबंधी) संक्रामक एनीमिया के लिए – पुनः संयोजक एलिसा किट जारी किया। दोनों रोग भारत में उल्लेखनीय हैं और देश में एनीमिया को नियंत्रित करने और मिटाने के लिए विशेष निदान की आवश्यकता है। उन्होंने राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के अनुसंधान परिणाम और प्रोफाइल संबंधित एक तकनीकी बुलेटिन भी जारी किया।

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श्रीमती कृष्णा राज, कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री; डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग); डॉ. जयकृष्ण जेना, उप महानिदेशक (मात्स्यिकी); डॉ. अशोक कुमार, सहायक महानिदेशक (पशु स्वास्थ्य); डॉ. एस. होन्नापागोल, पशुपालन आयुक्त और डॉ. बी. एन. त्रिपाठी, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

ग्लैंडर्स घोड़े की एक घातक, संक्रामक और उल्लेखनीय बीमारी है जिसमें घोड़े, गधे और खच्चर शामिल हैं। यह बीमारी बुर्खोलदेरिआ मैली नामक जीवाणु के कारण होती है और इसमें जूनोटिक क्षमता होती है। जीव को संभावित जैव-हथियार भी माना जाता है और 'टियर 1 सिलेक्ट एजेंट' के तहत वर्गीकृत किया जाता है। 8 से अधिक वर्षों के निरंतर अनुसंधान प्रयासों के बाद, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र पूरक-निर्धारण परीक्षण के विकल्प के रूप में एक पुनः संयोजक हेप 1 एंटीजन एलिसा को विकसित करने में सक्षम रहा है। एलिसा को भारत और ऑफिस इंटरनेशनल डेस एपीज़ूटीज़ (OIE) संदर्भित प्रयोगशाला, जर्मनी में विधिवत सत्यापित किया गया है और उत्कृष्ट संवेदनशीलता (97.2%) और विशिष्टता (99.6%) दिखाई गई है। डी ए डी एफ (DADF) और कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की मंजूरी के बाद इस तकनीक को 8 राज्य रोग निदान प्रयोगशालाओं में स्थानांतरित कर दिया गया है और किट के उपयोग हेतु परिवर्तन के लिए व्यावसायीकरण किया गया है। एलिसा के अंतर्राष्ट्रीय व्यवसायीकरण की बहुत बड़ी संभावना है क्योंकि पुनः संयोजक प्रोटीन-आधारित एलिसा किसी अन्य देश में उपलब्ध नहीं है। यह तकनीक भारत से ग्लैंडर्स को नियंत्रित करने और मिटाने में एक मील का पत्थर साबित होगी।

इक्विन इंफेक्शियस एनीमिया (EIA) एक चिरकालिक, ​​कमजोरी लाने वाली और लगातार संक्रामक बीमारी है जो रेट्रोवायरस के कारण होती है। यह ऑफिस इंटरनेशनल डेस एपीज़ूटीज़ (OIE) द्वारा दर्ज किया गया रोग है। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र ने कॉगिन के परीक्षण के विकल्प के रूप में पुनः संयोजक p26 प्रोटीन-आधारित एलिसा को भी विकसित किया है। यह तकनीक इक्विन इंफेक्शियस एनीमिया (EIA) की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिजन और सामंजस्यपूर्ण प्रोटोकॉल का स्थायी और सजातीय स्रोत प्रदान करेगी। आयातित किट की तुलना में दोनों किट अत्यधिक किफायती हैं।

(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार)