श्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा "न्यूट्री-स्मार्ट विलेज" कार्यक्रम का शुभारंभ

10 नवंबर, 2021, नई दिल्ली

2018 में शुरू की गई समग्र पोषण के लिए प्रधान मंत्री की व्यापक योजना (पोषण अभियान) ने बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण स्थिति को सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

कृषि और पोषण गहन रूप से जुड़े हुए हैं जो सीधे एक-दूसरे के परिणामों को प्रभावित करते हैं। इन दोनों के बीच सबसे मजबूत बंधन कृषक महिलाओं का है, जिन्हें वृहद् पैमाने पर पोषण कार्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। इसलिए प्रभावी नीतियों के साथ-साथ किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों ने भारत को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बना दिया है और अन्न भंडार भी अब भर रहे हैं। फिर भी कुपोषण आज भी विद्यमान है।

पोषण अभियान को सुदृढ़ करने से मां और बच्चे के बेहतर पोषण और स्वास्थ्य परिणामों को प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।

भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आज नई दिल्ली में पोषण अभियान को सुदृढ़ करने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, श्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा "पोषण स्मार्ट गांव" कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

Shri Narendra Singh Tomar, Union Agriculture Minister launches “Nutri-Smart Village” Programme  Shri Narendra Singh Tomar, Union Agriculture Minister launches “Nutri-Smart Village” Programme

बतौर मुख्य अतिथि, अपने संबोधन में श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कुपोषण की समस्या को एक बड़ी चुनौती बताते हुए उससे कुशलता के साथ प्रभावी तरीके से निपटने पर जोर दिया। श्री तोमर ने माताओं को एक मजबूत समाज और राष्ट्र के स्तंभ का आधार मानते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने गेहूं और चावल के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली में मोटे अनाज को शामिल करने पर भी जोर दिया। श्री तोमर ने स्पष्ट रुप से कहा कि मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण समाज को कुपोषण की समस्या से कुशलतापूर्वक निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री, श्री कैलाश चौधरी ने केंद्र सरकार की किसानों के लिए लाभकारी एवं उनकी आय को दोगुना करने के उद्देश्य से चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं और नीतियों को रेखांकित किया। माननीय मंत्री ने प्रत्येक व्यक्ति को पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने पर जोर  दिया।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री, सुश्री शोभा करंदलाजे भी उपस्थित थीं।

श्री संजय अग्रवाल, सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने बताया कि भारत सरकार के अथक प्रयासों से ही संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष – 2023 को “अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष” घोषित किया है।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (आईसीएआर) ने भारत सरकार के पोषण अभियान को मजबूती प्रदान करने के लिए प्रधान मंत्री द्वारा जारी की गईं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली की 85 जैव-फोर्टिफाइड किस्मों को रेखांकित किया। डॉ. महापात्र ने वर्तमान में किए गए कृषि विकास कार्यों को गांवों के हर घर तक पहुंचाने पर जोर दिया। महानिदेशक ने पोषक तत्वों के प्रति-संवेदनशील कृषि संसाधन और नवाचार (नारी) कार्यक्रम को भी रेखांकित किया, जो समाज से कुपोषण के पूर्ण उन्मूलन के लिए समर्पित है। डॉ. महापात्र ने भाकृअनुप-केंद्रीय कृषि महिला संस्थान, भुवनेश्वर, ओडिशा को कृषक महिलाओं को उनके अच्छे स्वास्थ्य हेतु पोषण के लाभों के विभिन्न पहलुओं पर सशक्त बनाने के लिए दी गई जिम्मेदारी के बारे में अवगत कराया।

अपने स्वागत सम्बोधन में डॉ. आर.सी. अग्रवाल, उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा), भाकृअनुप ने कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने तीन प्रमुख उद्देश्यों – ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि महिलाओं और स्कूली बच्चों को शामिल करते हुए पोषण जागरूकता, शिक्षा और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना; कुपोषण को दूर करने के लिए स्थानीय व्यंजन विधि के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करना और घरेलू कृषि और पोषक उद्यान के माध्यम से पोषण तत्वों के प्रति संवेदनशील कृषि को लागू करना, इत्यादि, के अंतर्गत कार्यक्रम के निष्पादन को रेखांकित किया। उप-महानिदेशक ने ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित समन्वय संस्थान के अलावा कृषि में महिलाओं के लिए भाकृअनुप-एआईसीआरपी के नेटवर्क के माध्यम से 13 राज्यों के 23 जिलों में स्थित 75 गांवों में कार्यक्रम के कार्यान्वयन के बारे में भी बताया।

डॉ. अनिल कुमार, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईडब्ल्यूए, भुवनेश्वर, ओडिशा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

गणमान्य व्यक्तियों ने खाद्य उत्पादों की तकनीकी प्रोफ़ाइल के द्वारा  भारत में कृषि कार्य में महिलाओं की भागीदारी एवं तकनीकी बुलेटिन तथा आजीविका, पोषण, उद्यमिता और बाजरा आधारित कम ग्लाइसेमिक युक्त पोषक उत्पादों को संबोधित करने तथा लिंग-संवेदनशील कृषि-बागवानी फसल प्रणाली मॉडल पर विभिन्न प्रकाशन भी जारी किए। इस अवसर पर मधुमेह की रोकथाम के लिए मल्टीग्रेन मिश्रित सूचकांक एवं कुपोषण के प्रबंधन के लिए बाजरा आधारित पोषक तत्व, घने बहु-अनाज मिश्रण और मोटापे के प्रबंधन के लिए बाजरा आधारित उच्च फाइबर बहु-अनाज मिश्रण आदि का भी बुलेटिन के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय कृषि महिला संस्थान, भुवनेश्वर, ओडिशा)