श्री गिरिराज सिंह ने किया भाकृअनुप-कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय का दौरा

5 अक्टूबर, 2019, हैदराबाद

श्री गिरिराज सिंह, केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने आज भाकृअनुप-कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद का दौरा किया।

Shri Giriraj Singh visits ICAR-DPR, Hyderabad  Shri Giriraj Singh visits ICAR-DPR, Hyderabad

मंत्री ने वैज्ञानिकों से किसानों और उद्यमियों की जरूरतों को पूरा करने और परिणामोन्मुखी काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कम लागत के पक्षियों के कुशल पालन के लिए लागत को कम करने के उपायों, जैसे वर्मी-कम्पोस्टिंग और मोरिंगा की खेती के लिए उपयुक्त मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इससे किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

आदिवासी और अनुसूचित जाति के किसान लाभार्थियों के साथ बातचीत के दौरान मंत्री ने अनुसूचित जाति उप योजना और आदिवासी उप योजना के तहत कड़कनाथ और बेहतर कुलीन मुर्गियों को अन्य आवश्यक आदानों के साथ वितरित किया। उन्होंने किसानों से ग्रामीण स्तर पर उद्यमियों की भागीदारी के साथ सामूहिक मोड के तहत अधिक संख्या में कम लागत वाले पक्षियों के पालन के लिए आग्रह किया।

श्री सिंह ने समिति हॉल के लिए आधारशिला रखी। उन्होंने हैचरी, शुद्ध लाइन और देशी नस्ल के खेत, मुर्गी पालन अपशिष्ट प्रबंधन इकाई और मोरिंगा कृषि फार्म का भी दौरा किया और प्रगति की समीक्षा की।

डॉ. जयकृष्णा जेना, उप महानिदेशक (मत्स्य और पशु विज्ञान), भाकृअनुप ने किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में भाकृअनुप-डीपीआर द्वारा विकसित ग्रामीण कुक्कुट किस्मों द्वारा निभाई जा रही भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने आईएलआरआई के सहयोग से संस्थान द्वारा जीडब्ल्यूएएस और एसएनपी चिप विकास की शुरुआत के बारे में भी बताया।

डॉ. आर. एन. चटर्जी, निदेशक, भाकृअनुप-डीपीआर ने इससे पहले इन मुर्गी किस्मों के पालन के माध्यम से ग्रामीण सीमांत किसानों की आर्थिक उत्थान के लिए स्थानीय वनस्पतियों का उपयोग करके मुर्गी किस्मों के विकास में एआईसीआरपी-केंद्रों के साथ-साथ भाकृअनुप-डीपीआर के योगदान के बारे में मंत्री को अवगत कराया।

हैदराबाद स्थित भाकृअनुप-संस्थानों के विभिन्न अधिकारियों, राज्य पशुपालन विभाग, पीवीएनआरटी पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय, एनएफडीबी और सीपीडब्ल्यूडी ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद)