लेडुम गाँव, अरुणाचल प्रदेश में मिथुन मेला का हुआ आयोजन

12 फरवरी, 2019, लेडुम गाँव, अरुणाचल प्रदेश

भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र और पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग, अरुणाचल प्रदेश, सरकार के सहयोग से जनजातीय उप-योजना के तहत आज यहाँ ‘मिथुन मेला-सह-प्रौद्योगिकी जागरूकता कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया।

Mithun Mela at Ledum village Arunachal Pradesh  Mithun Mela at Ledum village Arunachal Pradesh

श्री ततुंग जामो, विधायक ने अपने उद्घाटन भाषण में उच्च घनत्व मिथुन आबादी वाले जिलों के गाँवों में से एक, लेडुम में कार्यक्रम के आयोजन के लिए भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्‍द्र के प्रयासों की सराहना की और किसानों से अधिक लाभ के लिए व्यवहार्य आर्थिक गतिविधि के रूप में मिथुन के वैज्ञानिक पालन को अपनाने का आग्रह किया।

श्री तपोंग तालोग, पूर्व निदेशक, शिक्षा विभाग, अरुणाचल प्रदेश सरकार, कार्यक्रम के सम्माननीय अतिथि थे।

अभिजीत मित्रा, निदेशक, भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र, ने इससे पहले मिथुन और उसके संरक्षण के वैज्ञानिक अर्ध-गहन पालन को लोकप्रिय बनाने की दिशा में संस्थान की कई पहलों के बारे में जानकारी दी।

मेले में 400 किसानों ने भाग लिया था। किसानों ने 100 से अधिक मिथुनों, जिन्हें एफएमडी (FMD) और बीक्यू (BQ) के खिलाफ टीका लगाया गया था, को मेला स्थल पर लाया था। कई प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया था। सर्वश्रेष्ठ मिथुन बैल, मिथुन गाय और मिथुन हेफ़र्स के मालिकों को नकद पुरस्कार और प्रमाण पत्र दिए गए। अर्द्ध-गहन मिथुन पालन के बढ़ावा के लिए, गाँव के मिथुन रीअरिंग सोसाइटी को कांटेदार तार, सीजीआई शीट, जीयू जूते, रेनकोट और ट्रैविस सहित कई इनपुट दिए गए।

एक वैज्ञानिक-किसान परस्पर संवादात्मक बैठक भी आयोजित की गई। बातचीत के दौरान, नियमित टीकाकरण की आवश्यकता, खनिज मिश्रण के साथ पूरकता, अच्छे बैल का उपयोग और प्रजनन के उद्देश्य के लिए सबसे बड़े बैल का संरक्षण, मांस, दूध, चमड़े के स्रोत के रूप में मिथुन के विविध उपयोग का विस्तृत विवरण दिया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र)