राष्ट्रीय कृषि-व्यवसाय उद्यमिता कॉन्क्लेव-सह-कृषि उन्नति मेला का हुआ समापन

11 फरवरी, 2019, उमियम, मेघालय

भाकृअनुप-उत्तरपूर्वी पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, उमियम, मेघालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कृषि-व्यवसाय उद्यमिता कॉन्क्लेव-सह-कृषि उन्नति मेला आज संपन्न हुआ।

कॉन्क्लेव का आयोजन परिसर में 9-11 फरवरी, 2019 तक किया गया था।

National Agri-business Entrepreneurship Conclave-Cum-Krishi Unnati Mela concludes  National Agri-business Entrepreneurship Conclave-Cum-Krishi Unnati Mela concludes

श्री किरमेन शायला, कैबिनेट मंत्री, मेघालय सरकार ने मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में क्षेत्र में कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए भाकृअनुप-उत्तरपूर्वी पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर के प्रयासों की सराहना की।

सम्माननीय अतिथि, श्री एलेनट्री एफ. खार, राजनीतिक सलाहकार और मुख्यमंत्री के सचिव, मेघालय सरकार ने कृषि के तरीकों में बदलाव लाने के लिए भाकृअनुप के पहल की सराहना की।

डॉ. एन. प्रकाश, निदेशक, भाकृअनुप-उत्तरपूर्वी पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, ने कहा कि सम्मेलन ने उद्यमियों और किसानों को अपने उत्पादन को कृषि-व्यवसाय में बदलने के लिए एक मंच प्रदान किया।

डॉ. जी. कादिरवेल, आयोजन सचिव ने कृषि-व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए सम्मेलन आयोजित करने के मुख्य उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि खरीदारों और विक्रेताओं के बीच 50 कड़ियाँ स्थापित करके यह सम्मेलन सफल साबित हुआ।

इस अवसर के दौरान आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों के विषय कृषि व्यवसाय और स्टार्ट-अप, कृषि व्यवसाय उपक्रम, पशुधन के तहत कृषि व्यवसाय उद्यम आदि के दायरे पर आधारित थे।

विभिन्न नवोन्मेषी विचारों और उनके कार्यान्वयन के बारे में चर्चा करने के लिए विभिन्न विचार-मंथन सत्रों का भी आयोजन किया गया था।

इस अवसर पर आयोजित कृषि उन्नति मेला ने किसानों को संबंधों के निर्माण और नियामक प्राधिकरणों, ब्रांडिंग और विपणन रणनीतियों के बारे में अपने ज्ञान को उन्नत करने के लिए एक प्रमुख मंच प्रदान किया।

कॉन्क्लेव में विभिन्न उद्यमियों, अभिनव किसानों, वित्तीय संस्थानों, कंसल्टेंट्स, खरीदारों, विक्रेताओं, वैज्ञानिकों, कृषि और प्रबंधन के छात्रों, इनक्यूबेटरों, विस्तार व्यक्तियों, सार्वजनिक प्रतिनिधियों आदि के साथ 500 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।

(स्रोत: भाकृअनुप-उत्तरपूर्वी पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, उमियम, मेघालय)