मृदा स्वास्थ्य कार्ड ने किसानों को अपनी ज़मीनों के स्वास्थ्य से कराया अवगत: श्री परषोत्तम रूपाला

कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं भा.कृ.अनु.प.-संस्थानों के निदेशकों के वार्षिक सम्मेलन का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुआ आयोजन

4-5 दिसंबर, 2020, कृषि भवन, नई दिल्ली

कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं भा.कृ.अनु.प.-संस्थानों के निदेशकों के वार्षिक सम्मेलन का आज कृषि भवन, नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजन किया गया।

श्री परषोत्तम रूपाला, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने बतौर मुख्य अतिथि विश्व मृदा दिवस के अवसर पर आयोजित इस बैठक के आयोजन तथा पूरे देश में कृषि-संसाधन, कृषि-शिक्षा और विस्तार प्रणाली को सुदृढ़ तरीके से संचालित करने के लिए भाकृअनुप की सराहना की। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कृषि विज्ञान केंद्रों के आधार को मजबूत करने का आग्रह किया ताकि क्षेत्रीय स्तर पर बीज रोपण से लेकर बीज प्रतिस्थापन तथा जेनेरिक कीटनाशक की आपूर्ति जैसे कार्यों को सटीकता से पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भा.कृ.अनु.प., कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रयासों का प्रतिफल पूरे देश को मिल रहा है।

 मृदा स्वास्थ्य कार्ड ने किसानों को अपनी ज़मीनों के स्वास्थ्य से कराया अवगत: श्री परषोत्तम रूपाला  मृदा स्वास्थ्य कार्ड ने किसानों को अपनी ज़मीनों के स्वास्थ्य से कराया अवगत: श्री परषोत्तम रूपाला

मंत्री ने स्थानीय प्रजातियों एवं कृषि-प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान सहित उनके पंजीकरण के लिए आग्रह किया। उन्होंने कुलपतियों से आग्रह किया कि छात्रों को सामूहिक तौर पर अनिवार्य परियोजना संबंधी अनुसंधान विषय प्रदान करें। श्री रूपाला ने भाकृअनुप-भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल को प्रतिष्ठित राजा भूमिबोल विश्व मृदा दिवस – 2020 पुरस्कार प्राप्त करने के लिए बधाई दी।

श्री कैलाश चौधरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने बतौर सम्मानित अतिथि किसानों के कल्याण के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं को रेखांकित करते हुए जोर देकर कहा कि किसान उत्पादक संगठन किसानों को उनकी उपज की कीमत का वसूली करने तथा उनके आय को दोगुना करने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि उत्पादन व आय में वृद्धि के लिए नई तकनीक और उन्नत किस्म के बीजों के उपयोग के साथ-साथ वैज्ञानिक पद्धति को अपनाना भी जरूरी है। श्री चौधरी ने धान की पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को पर्यावरण संरक्षण हेतु बहुत गंभीर समस्या बताया। उन्होंने नए कृषि-बिल के फ़ायदों के प्रसार के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों से आग्रह किया।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड ने किसानों को अपनी ज़मीनों के स्वास्थ्य से कराया अवगत: श्री परषोत्तम रूपाला  मृदा स्वास्थ्य कार्ड ने किसानों को अपनी ज़मीनों के स्वास्थ्य से कराया अवगत: श्री परषोत्तम रूपाला

इस अवसर पर भाकृअनुप-प्रकाशनों का विमोचन, संस्थानों को प्रशंसा-पत्र तथा विश्वविद्यालयों को रैंकिंग के आधार पर पुरस्कृत किया गया।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) ने अपने स्वागत संबोधन में भाकृअनुप, भाकृअनुप-संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों की उपलब्धियों, अनुसंधान गतिविधियों, आगामी योजनाओं और लक्ष्यों से अवगत कराया। उन्होंने किसानों के बीच जलवायु अनुकूल प्रौद्योगिकियों तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के विस्तार व प्रसार के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों की सराहना की।

महानिदेशक ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि आज के दिन पूरी दुनिया में विश्व मृदा दिवस मनाया जा रहा है, जिसका थीम है – ‘मिट्टी को जीवित रखना, मिट्टी की जैव-विविधता की रक्षा करना।’। उन्होंने कहा इस दिवस को मनाने का उद्देश्य किसानों के साथ-साथ आम लोगों को मिट्टी की महत्ता के बारे में जागरूक करना है।

डॉ. महापात्र ने नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन के लिए विश्वविद्यालय के कुलपतियों से आग्रह किया। उन्होंने कोविड-19 की चुनौतियों के दौरान भी भाकृअनुप द्वारा सफलतापूर्वक किए गए सारे कार्यक्रमों की जानकारी दी।   

श्री संजय कुमार सिंह, अतिरिक्त सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं सचिव (भा.कृ.अनु.प.) ने गणमान्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया तथा देश भर में भाकृअनुप के कार्यों व गतिविधियों को रेखांकित किया। अंत में उन्होंने कहा कि पूरे देश के कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, संस्थानों के निदेशकों, कृषि विज्ञान केंद्रों के बीच आपसी समन्वय की आवश्यकता है।

इस सम्मेलन में भाकृअनुप के उप महानिदेशकों, अतिरिक्त महानिदेशकों, कृषि विश्वविद्यालय के कुलपतियों, भाकृअनुप-संस्थानों के निदेशकों, कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुखों, भाकृअनुप के अधिकारियों और छात्रों ने आभासी तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज की। 

(स्त्रोत: भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय, नई दिल्ली)