महानिदेशक भाकृअनुप ने भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, मोतीहारी, बिहार, का दौरा किया

6-7 नवंबर, 2021, मोतीहारी, बिहार

डा. त्रिलोचन महापात्र सचिव (डीएआरई) एवं महानिदेशक ( भाकृअनुप) ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में अधिशेष-जल के प्रबंधन जैसे शोध योग्य मुद्दों को उठाने का आग्रह किया। डा. महापात्र 6-7 नवंबर, 2021  तक भाकृअनुप-महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई), मोतीहारी, बिहार, के दौरे पर थे। महानिदेशक के साथ सुरेश कुमार चौधरी, उप-महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं कृषि अभियंत्रिकी) भाकृअनुप एवं डॉ. आनन्द कुमार सिंह, उप-महानिदेशक ( बागवानी विज्ञान) भाकृअनुप भी थे।

DG, ICAR visits ICAR-MGIFRI, Motihari, Bihar  DG, ICAR visits ICAR-MGIFRI, Motihari, Bihar

गणमान्य व्यक्तियों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा, राष्ट्रीय धरोहर ध्वज, नव निर्मित मुख्य ऑफिस-सह-प्रयोगशाला भवन, सभागार, किसान छात्रावास-सह-अतिथिगृह इत्यादि के अपने दौरे के दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों एवं सदस्य-कर्मी से भी मुलाकात किए।

महानिदेशक ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, बाढ़ की निकासी, किसानों के खेतों में अवस्थित फसल एवं एकीकृत कृषि प्रणाली( आईएफएस) मॉडल के विकास के अवस्थिति विश्लेषण पर चर्चा किए। डॉ महापात्र ने जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए बकरी पालन और मछली पालन के महत्व पर विशेस रुप से प्रकाश डाला।

गणमान्य व्यक्तियों ने संस्थान के अनुसंधान परिषद का दौरा करते हुए, संस्थान के वैज्ञानिकों और स्टाफ सदस्यों से कहा की उन्हें आई.एफ.एस. मॉडल के विकास के लिए गहण आर्थिक विश्लेषण, व्यवस्थित वैज्ञानिक विश्लेशन एवं  किसानों के क्षेत्र में मान्यता और प्रौद्योगिकी विकास के परीक्षण की जरुरत है। यह उपाय जलभराव वाले क्षेत्रों को उत्पादक और लाभदायक बनाने में सहायक बनेगा।

डॉ. के.जी. मंडल, निदेशक, भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, बिहार ने अपने स्वागत भाषण में गणमान्य व्यक्तियों को संस्थान के बुनियादी ढांचे के विकास, अनुसंधान गतिविधियों, भविष्य की योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति से अवगत कराया।

(स्रोत: भाकृअनुप-महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार)