महानिदेशक, भाकृअनुप ने किया भाकृअनुप-अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना की वार्षिक समूह बैठक का उद्घाटन

15 मार्च, 2019, नई दिल्ली

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने डॉ. बी. पी. पाल ऑडिटोरियम, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली में आज ‘भाकृअनुप-अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना की 54वीं वार्षिक समूह बैठक' का उद्घाटन किया। बैठक का आयोजन 15 से 17 मार्च, 2019 तक किया जाएगा।

DG, ICAR inaugurates Annual Group Meeting of ICAR-AICRP on Pearl Millet  DG, ICAR inaugurates Annual Group Meeting of ICAR-AICRP on Pearl Millet

डॉ. महापात्र ने अपने उद्घाटन भाषण में इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अनुसंधान कार्यों में दिया गया योगदान महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से अपने सहकर्मियों द्वारा दिए गए योगदान को उचित महत्त्व देने का भी आग्रह किया।

महानिदेशक ने विभिन्न कृषि और संबद्ध विज्ञानों की पृष्ठभूमि के वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे अपने बहुमूल्य शोधों का उचित रिकॉर्ड बनाकर उनका दस्तावेजीकरण करें। उन्होंने कहा कि यह युवा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को अपने अनुसंधान क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न मुद्दों को तुरंत और प्रभावी ढंग से समझने के लिए सहायक होगा।

उन्होंने देश में जलवायु परिस्थितियों में अभूतपूर्व परिवर्तन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि फसलों के पोषण मूल्यों को अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से बनाए रखने के लिए वैज्ञानिकों को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को फसलों की उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

डॉ. महापात्र ने युवा वैज्ञानिकों से अपने वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुभवों से ज्ञान प्राप्त करने और फिर नामित दिशाओं में अपनी कार्य योजना शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसंधान कार्यों के क्षेत्र में उपयोग किए जा सकने वाले अवसरों की भरमार है।

डा. ए. के. सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) और निदेशक, आईएआरआई, ने कहा कि अब तक, बाजरा (पर्ल बाजरा) के लगभग 16 संकर/कंपोजिट विकसित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि फसल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की भी यह एकमात्र जिम्मेदारी और कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए नामित वैज्ञानिकों और किसानों को पर्ल बाजरा की भंडारण प्रणाली की गुणवत्ता को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा इससे फसल के प्राकृतिक पोषण मूल्यों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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डॉ. आर. बी. सिंह, पूर्व अध्यक्ष, नास, ने पर्ल बाजरा को देश के किसानों के लिए असली मोती बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुपोषण देश की प्रमुख समस्याओं में से एक है और इसे दूर करने के लिए तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अच्छे और स्वस्थ जीवन के लिए पोषक तत्त्वों से भरपूर बाजरा आवश्यक है। डॉ. सिंह ने फसल के संवर्धन के लिए आईसीएआर-एआईसीआरपी के प्रयासों और पहलों की भी सराहना की।

डॉ. सी तारा सत्यवती, परियोजना समन्वयक, भाकृअनुप- अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना, जोधपुर ने बाजरा के मुख्य पोषण मूल्यों और इसके स्वास्थ्य संबंधी फायदों पर प्रकाश डाला। डॉ. सत्यवती ने कहा कि वर्ष 2017-18 के दौरान 9.13 मिलियन टन के औसत उत्पादन और 1237 किलोग्राम/हेक्टेयर की उत्पादकता के साथ फसल पर 7.4 मिलियन हेक्टेयर की पैदावार हुई है। (डायरेक्टरेट ऑफ माइलेट्स डेवलपमेंट, 2019 प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर रिव्यू, 2019)।

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि बरसात (खरीफ) के मौसम (जून/जुलाई-सितंबर/अक्टूबर) में देश में उगाई जाने वाली फसल की खेती गर्मी के मौसम (फरवरी-मई) में गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के भागों में भी की जाती है और बारिश के बाद (रबी) महाराष्ट्र और गुजरात में छोटे स्तर पर।

उन्होंने कहा कि अनिवार्य समन्वित बहु-स्थान परीक्षणों के संचालन और परीक्षण प्रविष्टियों के मूल्यांकन के अलावा, भाकृअनुप-अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना अनुसंधान, प्रौद्योगिकी निर्माण और हस्तांतरण के माध्यम से पर्ल बाजरा के सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. सत्यवती ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पर्ल बाजरा पहली फसलों में से एक है जहाँ 'बेहतर एचएचबी-67' विकसित करने के लिए एमएएस रणनीति और उपकरण लागू किए गए हैं।

उन्होंने रेखांकित किया कि भाकृअनुप-अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना  कई नई शोध पहलों में प्रौद्योगिकी और ज्ञान भागीदार के रूप में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है, जैसे UNEP-GEF परियोजना, एनएफएसएम द्वारा बाजरा मिशन, भाकृअनुप के आला क्षेत्र का उत्कृष्टता (NAE) कार्यक्रम, आईसीएआर-बीएमजीएफ परियोजना, आदि।

(स्रोत: कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय, नई दिल्ली)