'भारत में मृदा प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता में सुधार और प्रवीणता परीक्षण' पर राष्ट्रीय वेबिनार का हुआ आयोजन

31 अक्तूबर, 2020, भोपाल

भाकृअनुप-भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल, मध्य प्रदेश ने आज ‘भारत में मृदा प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता में सुधार और प्रवीणता परीक्षण: विश्लेषणात्मक डेटा की गुणवत्ता में सुधार और मृदा परीक्षण विधियों के सामंजस्य’ पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया।

National Webinar on “Quality Improvement and Proficiency Testing of Soil Laboratories in India” organized  National Webinar on “Quality Improvement and Proficiency Testing of Soil Laboratories in India” organized

डॉ. एस. के. चौधरी, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भाकृअनुप ने अपने उद्घाटन संबोधन में मिट्टी परीक्षण में गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने की मजबूत आवश्यकता पर बल दिया। मृदा परीक्षण के एक समान प्रोटोकॉल विकसित करने पर सहमति जताते हुए उन्होंने मार्गदर्शन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए भारत में मृदा परीक्षण नेटवर्क स्थापित करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।

डॉ. अनुपम मिश्रा, कुलपति, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल, असम ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किसानों की आय को दोगुना करने के लिए मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक पोषक सिफारिशों की लागत को कम करके किसानों की उत्पादकता में वृद्धि करना होगा।

श्रीमती नोपमानी सुवन्नांग, अध्यक्ष, वैश्विक मृदा प्रयोगशाला नेटवर्क (ग्लोसोलान), एफएओ ने प्रतिभागियों को वैश्विक मृदा साझेदारी (जीएसपी) की गतिविधियों से अवगत कराया। उन्होंने नियमित प्रशिक्षण के माध्यम से प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता में सुधार करने तथा प्रयोगशालाओं में आँकड़ों की व्याख्या के लिए मानक परिचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के सामंजस्य आदि के लिए ग्लोसोलान के उद्देश्यों को रेखांकित किया।

डॉ. अशोक के. पात्रा, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएसएस, भोपाल, मध्य प्रदेश ने इससे पहले अपने स्वागत संबोधन में राष्ट्रीय वेबिनार के उद्देश्य के बारे में जानकारी देते हुए भारत में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का एक राष्ट्रीय नेटवर्क बनाने की आवश्यकता व्यक्त की।

वेबिनार का उद्देश्य प्रतिभागियों को गुणवत्ता सुधार और प्रवीणता परीक्षण की पूरी प्रक्रिया से अवगत करना था।

देश भर से कृषि विश्वविद्यालयों, भाकृअनुप-संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विभागों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 300 प्रतिभागियों ने आभासी तौर पर वेबिनार में भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल, मध्य प्रदेश)