भाकृअनुप-सीआईबीए, चेन्नई ने ग्रे मुलेट, मुगिल सेफालस जीनोम का अनावरण किया

भाकृअनुप-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रैकिशवाटर एक्वाकल्चर, चेन्नई के वैज्ञानिकों ने ग्रे मुलेट - मुगिल सेफालस के पूरे जीनोम को अनुक्रमित और इकट्ठा किया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। यह जलीय कृषि प्रजातियों की संपूर्ण जीनोम जानकारी में सतत उत्पादन और रोग प्रतिरोध, वृद्धि और विकास जैसे वांछनीय लक्षणों में सुधार के लिए जीनोमिक चयन एवं मछली के प्रजनन में संभावित अनुप्रयोग हैं। मुगिल सेफालस आमतौर पर दुनिया भर में पाया जाता है और ज्यादातर समुद्र के किनारे, मुहाना और खारे पानी के क्षेत्रों में रहता है। इस प्रकार की मछली वैश्विक मत्स्य पालन और जलीय कृषि के लिए वाणिज्यिक मूल्य की है जिसमें मुलेट रो उच्च मांग है।

ICAR-CIBA, Chennai unveils Grey Mullet, Mugil cephalus Genome

मुगिल सेफालस का संपूर्ण जीनोम अनुक्रम एक मील का पत्थर साबित हुआ है, और कोन्टिग-लेवल पर इस उच्च गुणवत्ता वाले जीनोम असेंबली में 20.15 एमबी की एन50 (N50) लंबाई के साथ 848 कोन्टिग्स शामिल हैं। स्केफॉल्ड लेवल पर, 583 स्केफॉल्ड में, 28.32 एमबी के एन50 (N50) के साथ 644 एमबी लंबाई की असेंबली होती है। मछली के जीनोम में 27,269 प्रोटीन-कोडिंग जीन होते हैं।

मुगिल सेफालस के लिए पहली बार सृजित संपूर्ण जीनोम अनुक्रम संयोजन में मुगिलीडेई (Mugilidae) परिवार को एक संदर्भ जीनोम के रूप में उपयोग किया गया है। जीनोम असेंबली के माध्यम से वांछनीय लक्षणों के लिए अनुमानित प्रोटीन अनुक्रमों के साथ उच्च-गुणवत्ता, गुणसूत्र-स्तरीय और अधिक अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में मदद करेगी। संपूर्ण जीनोम असेंबली भविष्य में व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण मछली प्रजातियों के लिए आनुवंशिक सुधार कार्यक्रमों को लागू करने के लिए आवश्यक आधारभूत जानकारी प्रदान करेगी।

मत्स्य जीनोम असेंबली में, संस्थान के वैज्ञानिक दल में डॉ. एम.एस. शेखर, डॉ विनय कुमार कटनेनी, डॉ अशोक कुमार जंगम, डॉ रेमंड जानी एंजल, डॉ कृष्णा सुकुमारन और डॉ एम कैलाशम शामिल थे। जीनोमिक्स पर जीनोम सीक्वेंसिंग परियोजना को वित्तीय रूप से भाकृअनुप-कंसोर्टियम रिसर्च प्लेटफॉर्म द्वारा समर्थित किया गया था और डॉ. जॉयकृष्ण जेना, उप महानिदेशक (मत्स्य विज्ञान), भाकृअनुप द्वारा समन्वित किया गया था।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय खारा जल जलीय कृषि संस्थान, चेन्नई)