भाकृअनुप-सिबा ने 'कलरफिशफीड' की प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए मैसर्स टेक्नो फीडर, प्राईवेट लिमिटेड के साथ किया समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

11 जून, 2019,चेन्नई

भाकृअनुप- केंद्रीय खाराजल मत्स्यपालन संस्थान (सिबा), चेन्नई ने आज यहाँ मैसर्स टेक्नो फीडर, प्राईवेट लिमिटेड के साथ 'कलरफिशफीड (Colourfishfeed)' की प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अनुकूलित चारा मिल (चक्की) और सजावटी मछली चारा उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक गैर-विशिष्ट आधार पर है।

ICAR-CIBA signs MoU for the technology transfer of ‘Colourfishfeed’with M/s.Techno feeder, Pvt. Ltd

मैसर्स टेक्नो फीडर, प्राईवेट लिमिटेड को भाकृअनुप-सिबा से तकनीकी मार्गदर्शन के साथ सजावटी चारे के उत्पादन करने की परिकल्पना की गई है। समझौते के अनुसार परीक्षण विपणन के लिए आवश्यक चारे की प्रारंभिक मात्रा सिबा द्वारा उत्पादित की जाएगी और ग्राहक बाद में अपनी सुविधाओं के अनुसार चारे का निर्माण करेगा।

‘कलरफिशफीड’ सजावटी मछली के अच्छे स्वास्थ्य और रंग को बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया चारा है, एक्वैरियम फीड में विकास प्राथमिक उद्देश्य नहीं है।

डॉ. के. के. विजयन, निदेशक, भाकृअनुप-सिबा ने इस क्षेत्र की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए गुणवत्ता वाले सजावटी चारे के भारतीय ब्रांड होने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, जो वर्तमान में विदेशी उत्पादों द्वारा आपूर्ति की जाती है। उन्होंने चारे की गुणवत्ता, लागत प्रभावशीलता और सामर्थ्य के महत्त्व पर जोर दिया।

डॉ. के. अंबासंकर, प्रौद्योगिकी टीम लीडर ने समझौता ज्ञापन के महत्त्व के बारे में जानकारी दी और इस पहल की आरंभिक बिंदु को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस मॉडल की सफलता और लागत प्रभावी और गुणवत्ता वाले चारे की उपलब्धता भारत में बढ़ते सजावटी मछली पालन क्षेत्र के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

श्री रंजीथ मणिवन्नन, निदेशक, टेक्नो फीडर प्राइवेट लिमिटेड, भारत ने कहा कि बाजार में उपलब्ध चारा न केवल महंगे हैं बल्कि गुणवत्ता अत्यधिक अस्थिर है। इस संयुक्त पहल से देसी ब्रांड एक्वैरियम चारे की स्थापना होगी और उपभोक्ता के लिए गुणवत्तापूर्ण चारे की आवश्यकता को पूरा किया जा सकेगा।

(स्त्रोत: भाकृअनुप- केंद्रीय खाराजल मत्स्यपालन संस्थान (सिबा), चेन्नई)