भाकृअनुप-सिबा, चेन्नई ने त्रिशूर-केरल से 'सजावटी मछली उद्यमी' के साथ किया समझौता ज्ञापन

8 मई, 2019, चेन्नई

भाकृअनुप- केंद्रीय खाराजल मत्स्यपालन संस्थान (सिबा), चेन्नई ने आज त्रिशूर के एक प्रगतिशील सजावटी मछली प्रजनक और व्यापारी श्री जोशी पॉल 'सजावटी मछली उद्यमी' के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

इस समझौता ज्ञापन के साथ, भाकृअनुप-सिबा ने देश में अधिक विकास की संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में खारे पानी के सजावटी जलीय कृषि की पहचान की।

ICAR-CIBA, Chennai inks MOU with “Ornamental Fish Entrepreneur” from Thrissur-Kerala

देश में पहली बार साझेदारी प्रणाली में किसान के साथ खारे पानी के सजावटी जलीय कृषि को बढ़ावा देने के लिए सिबा द्वारा यह प्रथम समझौता ज्ञापन है।

डॉ. के. के. विजयन, निदेशक, सिबा ने अपरिहार्य साधनों पर निर्भर होने के बजाय, तैयार फ़ीड का उपयोग करके प्रजनन और पालन से मूल्य श्रृंखला के विकास के माध्यम से निरंतरता सिद्धांतों पर खारे पानी के सजावटी मछली क्षेत्र को विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने देश और विदेशों में पोषण, स्वास्थ्य प्रबंधन, आनुवांशिकी और नई विपणन रणनीतियों के समावेशी समग्र दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

आयोजन के दौरान मत्स्य विभाग के वैज्ञानिकों के साथ डॉ. के. के. विजयन ने हैचरी के पहले बैच द्वारा उत्पादित मोनोडैक्टाइलस अर्जेन्टियस, सिल्वर मूनी सीड्स को श्री जोशी पॉल को सौंपा।

श्री जोशी पॉल ने खारा जल सजावटी मछली प्रजातियों की विशिष्टता और व्यापार पहलुओं को रेखांकित करने के साथ-साथ संस्थान के साथ इस नई साझेदारी की सफलता के बारे में अपनी आशा व्यक्त की।

डॉ. एम. कैलासाम, प्रधान वैज्ञानिक और प्रमुख, मत्स्य संस्कृति प्रभाग, सिबा ने चयनित सजावटी प्रजातियों के लिए संस्थान द्वारा विकसित की गई बीज उत्पादन तकनीक (सिल्वर मूनी, स्पॉटेड स्कैट, सिल्वर फिश (मिल्कफिश) और एट्रोप्लस एसपीपी के लिए संपूर्ण प्रौद्योगिकी पैकेज) की प्रगति को रेखांकित किया।

(स्रोत: भाकृअनुप- केंद्रीय खाराजल मत्स्यपालन संस्थान, चेन्नई)