भाकृअनुप-सिबा और मैनग्रोव फाउंडेशन, महाराष्ट्र ने सिंधुदुर्ग जिला, महाराष्ट्र के खाराजल में एशियाई समुद्री बैस की केज खेती का किया प्रदर्शन

15 जून , 2019, चेन्नई

भाकृअनुप-केंद्रीय खाराजल मत्स्यपालन संस्थान, चेन्नई ने मैनग्रोव फाउंडेशन, महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से ‘मैंग्रोव्स के आसपास रहने वाले दूसरे समुदायों के लिए विविध पालन प्रणालियों में बहु-पौष्टिक उम्मीदवार प्रजातियों के साथ खाराजल केज खेती’ परियोजना को लागू किया है।

डॉ. के. के. विजयन, निदेशक, भाकृअनुप-सिबा ने बतौर मुख्य अतिथि स्वस्थ भोजन, रोजगार सृजन और तटीय लोगों की आय बढ़ाने के लिए एक मॉडल के रूप में खारे पानी के केज खेती के दायरे को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मछली उत्पादन के साथ-साथ यह प्रक्रिया तटीय लोगों के लिए आजीविका प्राप्त करने और मैनग्रोव संसाधनों के संरक्षण में मदद करेगी।

  ICAR-CIBA and Mangrove Foundation of Maharashtra demonstrates Cage farming of Asian

श्री एन. वासुदेवन, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (APCCF) और कार्यकारी निदेशक, मैनग्रोव फाउंडेशन, महाराष्ट्र सरकार ने केज खेती को नीले-हरित क्रांति की दिशा में पहला कदम बताया है।

डॉ. क्लेमेंट बेन, मुख्य वन संरक्षक, कोल्हापुर ने अनुसंधान संस्थानों जैसे, भाकृअनुप-सिबा, राज्य सरकार की एजेंसियों और हितधारकों के बीच साझेदारी के महत्त्व पर जोर दिया।

केज खेती से की गई समुद्री बैस (एक प्रकार की मछली) की पहली फसल के प्रदर्शन का आयोजन आज पिंजरे की खेती वाली जगह मालवन, सिंधुदुर्ग, महाराष्ट्र में किया गया। इस अवसर पर स्वयं-सहायता समूहों और क्षेत्र के किसानों की सहभागिता बैठक भी हुई।

इस परियोजना के तहत गठित स्वयं-सहायता समूहों ने हैचरी से तैयार बीजों के उपयोग से एशियाई सीबैस मछली (Lates calcarifer) की केज खेती शुरू की और अनुकूलित लागत प्रभावी केजों में फ़ीड (सीबैस प्लस) तैयार किया।

Harvesting of fishes & harvested fishes   Harvesting of fishes & harvested fishes

लगभग 526 किलोग्राम सीबैस मछली की पैदावार हुई, जिन्हें एक एक घरेलू मछली व्यापारी को बेचा गया। लाभार्थी मछुआरों को 2 लाख रुपये की राशि वसूल कर सौंपी गई।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय खाराजल मत्स्यपालन संस्थान, चेन्नई)