भाकृअनुप-सिफरी ने मनाया स्थापना दिवस

17 मार्च, 2019, बैरकपुर

भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर ने आज यहाँ अपना 73वाँ स्थापना दिवस मनाया। संस्थान ने इस अवसर पर 'मत्स्य समृद्धि मेला' का भी आयोजन किया।

ICAR-CIFRI celebrates Foundation Day  ICAR-CIFRI celebrates Foundation Day

उद्घाटन समारोह में बैरकपुर घाट पर मेहमानों द्वारा गंगा नदी में भारतीय प्रमुख कार्प बीजों की 30,000 उन्नत मछली के बच्चे (फिंगरलिंग्स) के पालन को चिह्नित किया गया।

डॉ. विजयलक्ष्मी सक्सेना, महासचिव, भारतीय विज्ञान कांग्रेस ने मुख्य अतिथि के तौर पर भाकृअनुप-सिफरी के निदेशक और सभी स्टाफ सदस्यों की सराहना की। डॉ. सक्सेना ने जोर देकर कहा कि गंगा नदी में मछलियों की विविधता में सुधार के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।

डॉ. एन. साहा, कुलपति, बर्दवान विश्वविद्यालय ने सम्माननीय अतिथि के तौर पर 2,500 से अधिक किसानों की भागीदारी के साथ बड़े पैमाने पर मत्स्य समृद्धि मेले के आयोजन के लिए भाकृअनुप-सिफरी की सराहना की।

डॉ. अशोक कुमार सक्सेना, पूर्व महासचिव, भारतीय विज्ञान कांग्रेस ने दूसरी हरित क्रांति हेतु किसानों में जागरूकता पैदा करने के लिए सिफरी के प्रयासों की सराहना की।

डॉ. सुब्रत मंडल, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, कोलकाता ने सिफरी के प्रयासों और पहल की सराहना की। उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों के विस्तार के लिए नाबार्ड द्वारा हर संभव समर्थन का आश्वासन भी दिया।

श्री नवीन नायक, निदेशक, नेहरू युवा केंद्र, पश्चिम बंगाल और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह ने भाकृअनुप-सिफरी द्वारा वर्ष 2018-19 में 800 युवाओं के प्रशिक्षण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगले साल प्रशिक्षण के लिए लगभग 1,000 युवाओं को भाकृअनुप-सिफरी भेजा जाएगा।

श्री बबलू मजूमदार, अवार्डी फिश फार्मर ने अपनी उपलब्धि के बारे में भाकृअनुप-सिफरी की मदद को साझा किया। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में, कई मछुआरे अपने खेत में क्षेत्र प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

डॉ. बी. के. दास, निदेशक, सिफरी, बैरकपुर ने इससे पहले अपने स्वागत भाषण में भाकृअनुप-सिफरी के सफलता की कहानी के 72 वर्षों की यात्रा का हिस्सा बनने के लिए सिफरियंस, प्रगतिशील मछली किसानों, मत्स्य उद्योग आदि की सराहना की। निदेशक ने संस्थान की उपलब्धि और दूसरी हरित क्रांति के लिए निरंतर प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी।

मत्स्य प्रदर्शनी के मौके पर स्टालों में जीवित मछली, हिल्सा जीवन कहानी, सजावटी मछली इकाई, फ़ीड कंपनियों और मछली स्वास्थ्य इकाइयों आदि को दर्शाया गया।

मेला में किसान-वैज्ञानिक-सहभागिता-सत्र, उद्योग इंटरफेस बैठक, महिला मछुआरों के सत्र आदि भी आयोजित किए गए।

100 प्रगतिशील मछली किसानों, विभिन्न विश्वविद्यालयों के 300 छात्रों, 200 युवाओं, उद्यमियों, मछली व्यापारियों, मछली संसाधक, स्व-सहायता समूह, सजावटी मछली उत्पादकों और हैचरी मालिकों सहित लगभग 2,000 किसानों ने इस आयोजन में अपनी भागीदारी को सुनिश्चित किया।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)