भाकृअनुप-सिफरी ने किया 'फिश हार्वेस्ट मेला’ का आयोजन

14-15 जून, 2019, बिहार

भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता ने 14 से 15 जून, 2019 तक बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कररिया और सिरसा मौन (मीठे पानी वाले वेटलैंड्स) में दो दिवसीय 'फिश हार्वेस्ट मेला' का आयोजन किया।

ICAR-CIFRI organizes Fish Harvest Mela  ICAR-CIFRI organizes Fish Harvest Mela

श्री राधा मोहन सिंह, पूर्व केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री और संसद सदस्य (लोकसभा), पूर्वी चंपारण ने मेले का उद्घाटन किया। श्री सिंह ने कहा कि भाकृअनुप-सिफरी द्वारा किए गए वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से किसानों की आय को दोगुना करने के लिए पूर्वी चंपारण जिले के पाँच वेटलैंड्स के 800 से 900 मछुआरों के परिवारों को एनएफडीबी (NFDB) द्वारा संचालित कार्यक्रम से लाभान्वित किया गया है।

डॉ. बी. के. दास, निदेशक, भाकृअनुप-सिफरी ने संस्कृति-आधारित मत्स्य पालन के भाकृअनुप-सिफरी के तकनीकी हस्तक्षेप को रेखांकित किया। डॉ. दास ने कररिया मौन में 180 किलो/हेक्टेयर/वर्ष से लेकर लगभग 675 किलो/हेक्टेयर/वर्ष; सिरसा मौन में 190 किलो/हेक्टेयर/वर्ष से 320 किलो/हेक्टेयर/वर्ष; रूल्ही मौन में 70किलो/हेक्टेयर/वर्ष से 140 किलो/हेक्टेयर/वर्ष और मझरिया मौन में 60 किलो/हेक्टेयर/वर्ष से 120 किलो/हेक्टेयर/वर्ष दुगुनी-तिगुनी मछली की उपज प्राप्त करने के लिए किए गए प्रबंधन हस्तक्षेप के बारे में बताया।

डॉ. दास ने रेखांकित किया कि मछली की पैदावार के संबंध में बिहार के अंडर-वेटलैंड्स के इष्टतम दोहन में भाकृअनुप-सिफरी के तकनीकी हस्तक्षेप को केंद्रीय क्षेत्र योजना (सीएसएस) - नीली क्रांति के तहत 'वेटलैंड फिशरीज डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स ऑफ बिहार' नामक कार्यक्रम द्वारा सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया है।

तकनीकी हस्तक्षेप को स्थानीय मछुआरों से एक अनुकूल प्रतिक्रिया मिली है क्योंकि इससे न केवल बेरोजगारी को दूर करने में मदद मिली है, बल्कि नौकरियों की तलाश में युवा प्रवास को रोकने में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

कार्यक्रम में कुल 250 से अधिक मछुआरों ने अपनी भागीदारी दर्ज की।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)