भाकृअनुप-एनआरआरआई के आविष्कार वैकल्पिक ऊर्जा प्रकाश जाल का हुआ पेटेंट

8 फरवरी, 2021, कटक

भाकृअनुप-राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक, ओडिशा के वैज्ञानिकों द्वारा आविष्कार किए गए उन्नत सौर आधारित वैकल्पिक ऊर्जा प्रकाश जाल (एईएलटी) उपकरण को आज पेटेंट (एकस्व अधिकार संख्या - 357993) से सम्मानित किया गया। एईएलटी उपकरण सौर ऊर्जा चालित प्रणाली (रात में दीपक जलाने के लिए) का उपयोग करके फसल के खेतों में उड़ने वाले कई कीड़ों को फँसाने में मदद करता है जो भारत में अपनी तरह का पहला उपकरण है। संस्थान ने 18 मार्च, 2014 (आवेदन संख्या- 341/केओएल/2014) को आवेदन दर्ज़ किया। इस उपकरण का ईजाद डॉ. श्यामरंजन दास महापात्र, प्रधान वैज्ञानिक (एंटोमोलॉजी) और डॉ. (श्रीमती) मायाबीनी जेना, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक और प्रमुख, भाकृअनुप-एनआरआरआई, फसल संरक्षण प्रभाग द्वारा किया गया है।

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एईएलटी में उड़ने वाले कीड़ों को आकर्षित करने के लिए प्रकाश जाल इकाई शामिल है; प्रकाश जाल से कीड़ों को प्राप्त करने के लिए प्रकाश जाल इकाई के साथ एक संग्राहक इकाई (एकत्र करने वाला) को संयोजित किया गया है। कीट संग्रह इकाई में लुभाने तथा कीड़ों को निर्देशित करने के लिए एक कीप (फनल) लगा दिया जाता है। कीप शीर्ष पर शामिल हुए तीन गतिरोधकों का समर्थन करता है। फसल के खेतों में प्रकाश जाल स्थापित करने के लिए शीर्ष भाग पर एक हुक प्रदान किया गया है। प्रकाश जाल इकाई के ऊपर एक सौर पैनल को बैटरी चार्ज करने के लिए लगाया गया है जो लाइट ट्रैप यूनिट को आवश्यक बिजली की आपूर्ति करता है। दो कक्षों वाली संग्राहक इकाई को छोटे कीड़ों (ज्यादातर लाभकारी कीड़े) को अलग करने के लिए बड़े आकार के छिद्रों के साथ एक जाल द्वारा अलग किया जाता है और नीचे, कक्ष को खोलने व बंद करने के लिए एक ढक्कन प्रदान की जाती है। संग्राहक इकाई में एक वाइब्रेशन असेंबली (कंपन समन्वायोजन) होता है जिसमें नियंत्रक और एक संवेदक का संयोजन होता है जो जाल के कंपन के लिए नियंत्रक को पहला संकेत प्रसारित करता है।

एक बार जाल में कंपन शुरू हो जाएगा तो छोटे फायदेमंद कीड़े नीचे गिर जाएंगे और दूसरे कक्ष में इकट्ठा हो जाएंगे। छोटे गैर-लक्षित कीड़ों के फँसने से फसल पर्यावरण को बचाया जा सकता है। मुख्य कीट संग्रह इकाई से गैर-लक्ष्य/प्राकृतिक दुश्मनों से बचने की सुविधा कीट प्रबंधन के जैव-गहन दृष्टिकोण के लिए एक वांछनीय विशेषता है। प्रकाश जाल इकाई भी एक संवेदक के साथ प्रदान की जाती है जो टाइमर में उपयोगकर्ता द्वारा निर्धारित समय के अनुसार गोधूलि (शाम) के दौरान स्वचालित रूप से रोशन हो जाएगा और तीन से चार घंटे के बाद स्विच-ऑफ हो जाएगा। बादल और धुंध भरे मौसम में भी उपकरण को संग्रहित और संचालित करने के लिए उच्च क्षमता की बैटरी लगाई गई है। चार से पाँच दिनों तक चलने तथा इकाई को आवश्यक बिजली की आपूर्ति करने के लिए पूरी तरह से चार्ज की गई बैटरी पर्याप्त बिजली संग्रह कर सकती है। यह लागत प्रभावी है क्योंकि यह पोर्टेबल (वहनीय) होने के अलावा सौर ऊर्जा पर चलेगा। उपयोग में न होने पर उपकरण आसानी से विघटित और संग्रहीत हो जाता है। कम परिचालन लागत के साथ बड़ी संख्या में कीटों को कुशलता से संभालने में मदद करने तथा आसान उपयोग वाला स्वचालित एईएलटी एक आर्थिक और पर्यावरण के अनुकूल कीट फँसाने वाला उपकरण है जिसे न्यूनतम रखरखाव की आवश्यकता होती है।

(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक, ओडिशा)