भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी, देहरादून ने एनआरएससी, हैदराबाद के साथ समझौता ज्ञापन पर किया हस्ताक्षर

26 जुलाई, 2021, उधगमंडलम

‘तमिलनाडु के पश्चिमी घाट में चाय बागान पर वाष्पन-उत्सर्जन प्रतिरूपण, जल बजटकार्य और CO2 प्रवाह का आकलन’ पर एक अंतर-संस्थागत सहयोगात्मक परियोजना को निष्पादित करने के उद्देश्य से, भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून, उत्तराखंड ने राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, हैदराबाद के साथ आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

ICAR-IISWC, Dehradun inks MoU with NRSC, Hyderabad

भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी, अनुसंधान केंद्र, उधगमंडलम; केंद्रीय जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन (सीडब्ल्यूआरडीएम), कालीकट और राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, हैदराबाद के साथ सहयोगी इकाई है।

डॉ. एम. मधु, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी, देहरादून, उत्तराखंड और डॉ. वेंकटेश्वर राव, संयुक्त निदेशक, एनआरएससी, हैदराबाद ने अपने-अपने संगठनों की ओर से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

समझौता ज्ञापन के अनुसार, वर्तमान परियोजना वाष्पन-उत्सर्जन तंत्र और विभाजन, वायुमंडलीय CO2 प्रवाह पर एक अध्ययन करेगी जो पश्चिमी घाट से नीलगिरी के समशीतोष्ण पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख वृक्षारोपण चाय पर ऊर्जा विभाजन को समझने के लिए मार्गदर्शन करेगी।

समशीतोष्ण पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र से वाष्पोत्सर्जन, मृदा-वनस्पति-वायुमंडलीय विशेषताओं, मिट्टी और वायुमंडलीय CO2 पर उत्पन्न आँकड़ों का उपयोग भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी की अनुसंधान गतिविधियों में किया जाएगा और एनआरएससी (इसरो) के ‘राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (एनएचपी)’ के तहत एक डाटाबेस बनेगा।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून, उत्तराखंड)