भाकृअनुप-अखिल भारतीय समन्वयित अनुसंधान परियोजना (चारा फसलें एवं उपयोगिता) की राष्ट्रीय समूह बैठक का हुआ आयोजन

30-31 अगस्त, 2019, इंफाल, मणिपुर

National Group Meeting of ICAR-AICRP on Forage Crops and Utilization

अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना ने 30 से 31 अगस्त, 2019 तक केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल, मणिपुर में चारा फसलें एवं उपयोगिता पर राष्ट्रीय समूह की बैठक का आयोजन किया।

मुख्य अतिथि, डॉ. दिनेश कुमार, सहायक महानिदेशक (खाद्य और चारे की फसल), भाकृअनुप ने किसानों की आय और पशुधन उत्पादकता बढ़ाने के लिए चारा फसल प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रौद्योगिकियों के प्रभावी प्रसार के लिए अपना मत रखा। डॉ. कुमार ने परियोजना वैज्ञानिकों से किसानों की आय बढ़ाने के लिए नवीन प्रौद्योगिकियों के नवाचार का आग्रह किया।

सम्मानित अतिथि, डॉ. वी. के. यादव, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झाँसी ने उत्तर पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों के बीच अधिक सक्रिय सहयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने संस्थान द्वारा देश में चारा संसाधनों को बढ़ाने के लिए की जा रही विभिन्न नई पहलों के बारे में बताया।

प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह, कुलपति, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल ने चारा फसलें और पशुपालन के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मणिपुर में हाल के वर्षों में विदेशी मवेशियों के साथ-साथ देशी मवेशियों की प्रजातियों में बड़े पैमाने पर सुधार हुआ है। प्रो. सिंह ने वैज्ञानिकों से उनके लिए उपयुक्त किस्मों और प्रौद्योगिकियों पर काम करने का आग्रह किया।

डॉ. ए. के. रॉय, परियोजना समन्वयक ने पिछले 5 वर्षों की अवधि के दौरान परियोजना, इसकी मुख्य उपलब्धियों और रबी 2018-19 के दौरान किए गए गतिविधियों के सारांश और इसके परिणामों के बारे में जानकारी दी।

इस अवसर के दौरान भाकृअनुप-अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना समन्वय इकाई की एक पुस्तक ‘भारतीय चारा परिदृश्य: पुनर्निर्धारण राज्य वार स्थिति' और एक मोबाइल एप्प चारा बीज जारी किया गया।

भाकृअनुप-अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना चारा फसल केंद्र, बीएआईएफ, उरलिकांचन, पुणे को प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया।

चार चारा फसलों, ओट, ल्यूसर्न, राई घास और विकिया में कुल 8 किस्मों को देश के विभिन्न क्षेत्रों में जारी किया गया था।

बैठक में विभिन्न भाकृअनुप-संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिभागियों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-अखिल भारतीय समन्वयित अनुसंधान परियोजना (चारा फसलें एवं उपयोगिता), झाँसी)