"प्राकृतिक रेजिन और गोंद की कटाई, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन" नेटवर्क परियोजना की 13वीं वार्षिक कार्यशाला का आयोजन

9 - 10 नवंबर, 2021, झारखंड

भाकृअनुप-भारतीय प्राकृतिक रेजिन और गोंद संस्थान, रांची, झारखंड ने 9 से 10 नवंबर, 2021 तक "प्राकृतिक रेजिन और गोंद की कटाई, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (एनआरजीएस का एनपी-एचपीवीए)" पर नेटवर्क परियोजना की 13 वीं वार्षिक कार्यशाला का आयोजन किया।

13th Annual Workshop of Network Project on “Harvesting, Processing and Value-Addition of Natural Resins & Gums” organized  13th Annual Workshop of Network Project on “Harvesting, Processing and Value-Addition of Natural Resins & Gums” organized

डॉ. सुरेश कुमार चौधरी, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और कृषि इंजीनियरिंग), भाकृअनुप ने अपने उद्घाटन भाषण में प्राकृतिक रेजिन और गोंद के महत्व पर प्रकाश डाला। डीडी ने जागरुकता कार्यक्रमों और कार्यशालाओं आदि के माध्यम से परियोजना के लिए प्राकृतिक रेजिन और गोंद क्षेत्र के हितधारकों, उपभोक्ताओं और उद्यमियों को जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने परियोजना के लिए वास्तविक लक्ष्यों और एक समयसीमा  के साथ कार्य-योजना विकसित करने सहित तकनीकों एवं उत्पादों के व्यावसायीकरण करने की बात की।

डॉ. के.के. सिंह, एडीजी (फार्म इंजीनियरिंग), भाकृअनुप ने शोध की क्रियाशीलता का प्रथमिकीकरण करने को कहा ताकी उत्पादों, तकनीकों एवं गुणवत्ता के प्रकाशनों से परिणाम प्राप्त किया जा सके।

डॉ. के.के. शर्मा, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएनआरजी, रांची ने कहा कि सहयोगी केंद्रों को रेजिन और गोंद उत्पादन के पूर्ण मूल्य-श्रृंखला को अपने केंद्र के लिए सुरक्षित रखने के लिए प्रोत्साहित किया। किया। उन्होंने इस परियोजना के तहत रेजिन एवं गोंद के लिए प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन गतिविधियों को बढ़ाने पर भी जोर दिया।

अपने स्वागत भाषण में परियोजना समन्वयक डॉ. एन. प्रसाद ने कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य की जानकारी दी।

कार्यशाला का उद्देश्य नेटवर्क परियोजना केंद्रों की वार्षिक प्रगति की समीक्षा करना और वर्ष 2022-23 के लिए तकनीकी कार्यक्रमों पर चर्चा करना था।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय प्राकृतिक रेजिन और गोंद संस्थान, रांची, झारखंड)