नर्मदा के मुहाना में ऑक्टोपस का पहला रिकॉर्ड

भाकृअनुप-सिफरी, वडोदरा के अनुसंधान दल द्वारा नियमित सर्वेक्षण (3-5 दिसंबर, 2018) के दौरान बैग नेट पकड़ने में पहली बार भाकृअनुप-केंद्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान ने नर्मदा मुहाना में ऑक्टोपस की उपलब्धता की सूचना दी। सिस्टोपस इंडिकस (रैप, 1835), जिसे आमतौर पर बूढ़ी महिला ऑक्टोपस के रूप में जाना जाता है, को पहली बार भड़भुत क्षेत्र (21°40'52”एन, 72° 50'42”ई) पर नर्मदा नदी के मुहाना क्षेत्र से देखा गया है, जो समुद्र से लगभग 35 किमी दूर है।

Octopus, C. indicus recerded for the first time in Narmada estuary
बैग नेट के माध्यम से नर्मदा मुहाना से सिस्टोपस इंडिकस पकड़ा गया

सिस्टोपस इंडिकस ऑक्टोपोडिडे परिवार में ऑक्टोपोडा के क्लास सेफलोपोडा के तहत आता है। ऑक्टोपिडे की लगभग 200 प्रजातियाँ विश्व महासागरों से और 38 व्यापारिक रूप से महत्त्वपूर्ण प्रजातियाँ  भारतीय समुद्रों से बताई गई हैं। भारत में, ऑक्टोपस को मुख्य रूप से झींगा के जाल के लिए उपयोग किए जाने वाले ट्रॉवेल नेट (मछली पकड़ने का महाजाल) में पकड़ा जाता है। ऑक्टोपस ने 2017 के दौरान गुजरात में कुल मोलस्कैन (घोंघा) संसाधन (61688 टी) का 0.72% योगदान दिया। यह प्रजाति ज्यादातर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मुख्य रूप से फिलीपींस, चीन, बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान में वितरित की जाती है। ऑक्टोपस की अन्य महत्त्वपूर्ण प्रजातियाँ – ऑक्टोपस डॉलफुसी, ऑक्टोपस मेम्ब्रेनस, ऑक्टोपस लोबेंसिस और ऑक्टोपस वल्गेरिस – भारत के पश्चिमी तट में पाई जाती हैं। ऑक्टोपस एक समुद्री बन्थिक (नितल जीवसमूह) प्रजाति है, जो 50 मीटर की गहराई तक तटीय समुद्री जल में निवास करते थे, लेकिन शायद ही कभी मुहाना में देखा गया हो।

190-320 मिमी की लंबाई के साथ कुल 17 नमूनों को रिकॉर्ड किया गया है। 56.2 ग्राम वजन के साथ प्रजातियों की अधिकतम लंबाई 325 मिमी दर्ज की गई थी। इस प्रजाति की अधिकतम लंबाई बंगाल की खाड़ी से 600 मिमी बताई गई। दिसंबर 2018 के महीने में भड़भुत गाँव में बैग नेट (10 मिमी कॉड एंड जाल माप) मछली पकड़ने में ऑक्टोपस प्रजातियों की उपस्थिति की निगरानी की गई है।

बैग नेट को स्थानीय रूप से ‘गोलवा’ मत्स्य के रूप में जाना जाता है जिसे आमतौर पर सर्दियों (अक्टूबर से मार्च) के मौसम में लगाया जाता है, जो मुख्य रूप से हिलसा के बच्चों सहित समुद्री मछली प्रजातियों के लिए बना होता है, जबकि ऑक्टोपस की घटना पहली बार इसी से बताई गई है।

दिसंबर 2018 के दौरान भड़भुत की लवणता (21°40'52”एन, 72° 50'42”ई) और निकटवर्ती महेगम क्षेत्र (21°40'26”एन, 72°45'23”ई), 18-20 पीपीटी (पार्ट्स पर थाउजेंड) की सीमा में था, और ऑक्टोपस का मुहाना में होना या ऐसे समुद्री प्रजातियों के प्रवेश का कारण बाढ़ के ज्वार के साथ उच्च लवणता हो सकता है।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)