गंगासागर के चक्रवात प्रभावित अनुसूचित जाति और जनजाति किसानों की आय को दुगुना करना

10 नवंबर, 2021  

भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता सागर द्वीप, सुंदरबन के चक्रवात-प्रभावित मछुआरों की सहायता के लिए आगे बढ़े।

Doubling the Income of Cyclone-affected SC and ST Farmers of Gangasagar  Doubling the Income of Cyclone-affected SC and ST Farmers of Gangasagar

संस्थान ने चिंता जताया साथ ही सागर द्वीप के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (350 संख्या) के एक बड़े समूह के लाभार्थियों में आवश्यक साधन मछली के बीज, चूना, चारा और दवा वितरित करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किये। गंगासागर के 14 गांवों और 5 ग्राम पंचायतों के लाभार्थियों को आच्छादित करते हुए एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन दो स्थानों - जिबोंताला (150 लाभार्थी) और कृष्णानगर (200 लाभार्थी) में किया गया।

मछुआरों को 36 टन मछली का चारा, लगभग 100 लाख मछली के बीज और 350 दवाएं (मछली के लिए 200 मिली.) प्रदान किये गये।

श्री बंकिम हाजरा, पश्चिम बंगाल सरकार में सुंदरवन मामले के विकास मंत्री ने इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

डॉ. बी.के. दास, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर, कोलकाता ने अपने संबोधन में मंत्री को गंगासागर मछली-किसानों के विकास और कल्याण के लिए संस्थान की पहल और रणनीति से अवगत कराया। डॉ. दास ने कहा कि मछली पालन के वैज्ञानिक विधि द्वारा किसानों की आय को दोगुना करने और अनुसूचित जाति उप योजना/ एसटीसी कार्यक्रम के साथ-साथ भाकृअनुप-सीआईएफआरआई से प्राप्त साधन का उचित उपयोग करने का आग्रह किया।

श्रीमती नमिता हाजरा, पंचायत प्रधान, रुद्रनगर, सागर ने संस्थान के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने किसानों से अपने संसाधनों का उपयोग करने तथा संस्थान से प्राप्त साधनों द्वारा अपनी आय बढ़ाने का भी आग्रह किया।

कार्यक्रम का आयोजन स्वामी विवेकानंद यूथ एंड कल्चरल सोसाइटी, सागर और भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर, कोलकाता के स्टाफ सदस्यों द्वारा किया गया था।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता)