कृषि सांख्यिकी (आईकास-Vlll) पर आठवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ उद्घाटन

एक एकल छोटे धारक के हाथों में, सही जानकारी से एक खेत के लिए 20% राजस्व वृद्धि हो सकती है” – बिल गेट्स

18 नवंबर, 2019, नई दिल्ली

श्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार और श्री बिल गेट्स, सह-अध्यक्ष, बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की उपस्थिति में आज कृषि सांख्यिकी (आईकास-Vlll) पर आठवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया गया। इस आयोजन का विषय ‘सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कृषि के परिवर्तन के लिए सांख्यिकी’ है।

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार 18 से 21 नवंबर, 2019 तक नई दिल्ली में इस सम्मेलन का आयोजन कर रहा है।

सांख्यिकी और कृषि के क्षेत्र में भारतीय विशेषज्ञता को उजागर और साझा करने का अवसर प्रदान करते हुए भारत पहली बार इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह आयोजन वैश्विक विशेषज्ञों के साथ बातचीत करने और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक विकास का हिस्सा बनने के लिए एक मंच प्रदान करते हुए भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए सबसे अद्यतन और वर्तमान ज्ञान लाने का काम करेगा।

8th International Conference on Agricultural Statistics (ICAS-Vlll) inaugurated 8th International Conference on Agricultural Statistics (ICAS-Vlll) inaugurated  8th International Conference on Agricultural Statistics (ICAS-Vlll) inaugurated

श्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि कृषि सांख्यिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करना बड़े ही गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में सरकार द्वारा चलाई जा रही कोई भी योजना कृषि सांख्यिकी के बिना संभव नहीं हो पाएगा। उन्होंने बताया कि जीवन के हरेक क्षेत्र की तरह कृषि में भी सांख्यिकी का अपना महत्त्व है। श्री तोमर ने कहा कि यह एक ऐसा अवसर है जब वैश्विक स्तर पर संबंधित विषय-विशेषज्ञ एक-दूसरे के अनुभव से लाभान्वित होंगे।

श्री बिल गेट्स, सह-अध्यक्ष, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने बतौर मुख्य अतिथि आँकड़ों और नवीन प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए कृषि उत्पादकता में सुधार के विषय पर श्रोताओं को संबोधित किया। इस अवसर पर अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि “एक एकल छोटे धारक के हाथों में, सही जानकारी से एक खेत के लिए 20% राजस्व वृद्धि हो सकती है।” उन्होंने आगे कहा, “अगर कृषि क्षेत्र में हर किसी के पास गुणवत्ता की जानकारी उपलब्ध हो, तो हम दुनिया के 2 अरब छोटे धारकों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने में मदद कर सकते हैं।”

श्री कैलाश चौधरी, राज्य मंत्री, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने कृषि सांख्यिकी के क्षेत्र में कार्यरत सांख्यिकीविदों और वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए किसानों की दुगुनी आय के लिए सरकार द्वारा चालाई जा रही योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के सफलतापूर्वक समापन की कामना की।

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प्रो. रमेश चंद, सदस्य, नीति आयोग, भारत ने कृषि आँकड़ों के सांख्यिकी की तत्परता और कुशलता से निगरानी करने के लिए कुछ प्रभावी तरीके अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने सांख्यिकीय आँकड़ों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी पर भी जोर दिया। इससे समय बचाने और आँकड़ों की सटीकता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

श्री प्रवीण श्रीवास्तव, सचिव, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय और मुख्य सांख्यिकीविद्, भारत सरकार ने कहा कि भारत में भारी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था सांख्यिकीय आँकड़े एकत्र करने के लिए चुनौतियां बन गई है। चूँकि, मैनुअली आँकड़ों का संग्रहण एक चुनौती है, इसलिए कृषि सांख्यिकीय आँकड़ों के संग्रहण के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक है।

माइकल स्टीनर, आईएसआई कास और वर्ल्ड बैंक ने कहा कि भारत जैसे कृषि-केंद्रित देशों में इस प्रकार के सम्मेलनों का आयोजन करना वास्तव में समयानुकूल है। उन्होंने देश के समग्र विकास के लिए कृषि सांख्यिकी के प्रबंधन के महत्त्व पर जोर दिया।

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श्री यूगो एस्टुटो, राजदूत, यूरोपीय संघ ऑफ इंडिया ने कहा कि सांख्यिकीय आँकड़े सतत विकास लक्ष्यों को साकार करने में मदद करते हैं। यह देश की प्रगति की निगरानी करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

श्री पिएत्रो जेनारी, मुख्य सांख्यिकीविद, एफएओ, रोम ने उल्लेख किया कि सम्मेलन ने कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों को अपनी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान किया है। वास्तव में यह कृषि सांख्यिकीय आँकड़ों को बनाए रखने और निगरानी करने पर भविष्य की कई योजनाओं पर चर्चा करने और उसे अंतिम रूप देने का एक शानदार अवसर है।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने इससे पहले स्वागत संबोधन में कहा कि कृषि सांख्यिकी का त्वरित प्रबंधन भारत जैसे कृषि केंद्रित देश के लिए महत्त्वपूर्ण है। डॉ. महापात्र ने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने, किसानों की आय बढ़ाने, गरीबी और कुपोषण उन्मूलन और सतत विकास लक्ष्यों के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सम्मेलन कृषि सांख्यिकी के क्षेत्र में विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के लिए एक बड़ा मंच होगा।

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इस सम्मेलन में एफएओ, यूएसडीए, यूरोस्टैट, एडीबी, एएफडीबी, विश्व बैंक और दुनिया भर के 100 से अधिक देशों के लगभग 200 प्रतिनिधियों सहित कुल 600 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

(स्त्रोत: कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय, नई दिल्ली)