किसान गोष्ठी आयोजित

10 नवंबर, 2021

भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून, उत्तराखण्ड ने देहरादून कोटिमचक के रायपुर ब्लॉक में किसान गोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर रबी फसल से संबंधित समस्याओं पर विचार-विमर्श के साथ आजीविका, भोजन और खाद्य सुरक्षा को उत्कृष्ट बनाए जाने पर विचार किया गया।

Kisan Goshthi organizedश्री बांके बिहारी, प्रधान वैज्ञानिक (कृषि विस्तार) भाकृअनुप-आईआईएसडब्लूसी, देहरादून एवं प्राथमिक अन्वेषक, किसान प्रथम परियोजना ने अपने स्वागत सम्बोधन में कहा कि परियोजना के तहत विभिन्न मध्यस्थता का क्रियाण्यन किया गया एवं जिस गांव को गोद लिया गया उसके कृषक समुदाय को काफी लाभ हुआ है। डॉ. बिहारी ने किसानों से लाभकारी और मध्यस्थ तकनीकि का उपयोग जारी रखने का आग्रह किया।

डॉ एम मुरुगनंदम, प्रधान वैज्ञानिक (मत्स्य विज्ञान विज्ञान), भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी, देहरादून ने ग्रामीण आजीविका एवं खाद्य सुरक्षा को पूरा करने में संतुलित आहार, खाद्य उत्पादन, खपत और पशुधन, मुर्गी पालन और मछली पालन-आधारित मध्यस्थता और प्रौद्योगिकियों के विविधीकरण के महत्व के द्वारा रेखांकित किया गया था।

श्री गजेन्द्र कुमार, मुख्य राज्य विपणन प्रबंधक, कृभको, देहरादून ने किसानों के लाभ के लिए उपलब्ध योजनाओं और कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला।

डॉ. बी.बी. मिश्रा उत्तराखंड बीज एवं तराई विकास निगम (यूएसटीडीसी), देहरादून के परियोजना अधिकारी ने किसानों के उत्पादन और यूएसटीडीसी के साथ मौजूद बायबैक व्यवस्था से बीज गुणवत्ता लाभ के आकलन और खरीद में अपनाई गई कड़ी प्रक्रिया के बारे में बताया।

इस अवसर पर किसानों को आधुनिक उन्नत खेती के तरीकों, आय-सृजन गतिविधियों एवं उर्वरकों के अवैज्ञानिक तरीकों से उपयोग के दुष्प्रभाव, मिट्टी की तैयारी और खेती के तरीकों के बारे में जागरूक किया गया।

गुणवत्ता वाले अनाज का उत्पादन करने और बीजों की खरीद और वितरण के लिए यूएसटीडीसी की बाय-बैक व्यवस्था से लाभान्वित होने के लिए लगभग 100 किसानों को गेहूं के प्रमाणित बीज से सम्मानित किया गया।

गोष्ठी में 150 से अधिक किसानों, कृषि महिलाओं और ग्राम प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून, उत्तराखंड)