ओडिशा के मत्स्य पालन पर चक्रवात ‘फानी’ के प्रभाव का अध्ययन

5-11 जून, 2019, ओडिशा

बंगाल की खाड़ी से बेहद भयंकर चक्रवाती तूफान ‘फानी’ लगभग 200 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से 3 मई, 2019 को ओडिशा तट पर पुरी जिले में उतरा था। परिणामस्वरूप 4 जिलों अर्थात पुरी, कटक, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर में काफी क्षति हुई। भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर के वैज्ञानिकों की एक टीम ने ओडिशा के प्रभावित इलाकों में मत्स्य क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए नुकसान का आकलन किया। टीम में जलीय कृषि, मत्स्य संसाधन प्रबंधन, कृषि रसायन, कृषि अर्थशास्त्र और कृषि विस्तार जैसे विभिन्न विषयों के वैज्ञानिक शामिल थे। अध्ययन की शुरुआत फानी तूफान द्वारा किए गए नुकसान के एक क्षेत्र के आकलन के साथ हुई।  

Study on the impact of cyclone Fani on Fisheries of Odisha  Study on the impact of cyclone Fani on Fisheries of Odisha

अंतर्देशीय जल में फानी के प्रभाव को समझने के लिए मत्स्य पालन और मछुआरों, नदियों और एस्टुरीन (महानदी) और लैगून (चिलिका) पारिस्थितिक तंत्रों का चयन किया गया था। मूल्यांकन में सभी जैविक और अजैविक मापदंडों का विश्लेषण किया गया था और उनकी तुलना 2016 से की गई थी। प्रारंभिक विश्लेषण में मछली पकड़ने में कोई महत्त्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। यह भी दर्ज किया गया है कि लैगून चिलिका और नदियों महानदी, कथाजोड़ी-देवी के जल गुणवत्ता अपनी सामान्य स्थिति तक पहुँच चुके हैं और उत्पादन प्रक्रिया में योगदान करने के लिए सामान्य रूप से उत्पादक हैं। मछली पकड़ने की संरचना और प्रति यूनिट प्रयास को पकड़ने आदि में कोई बड़ी असामान्यता दर्ज नहीं की गई थी।

टीम ने जगतसिंहपुर जिले में महानदी मुहाना के लगभग 15 मछुआरों के गाँव और पुरी जिले में चिलिका लगून और पुरी के विभिन्न क्षेत्रों का भी दौरा किया। टीम ने दर्ज किया कि पुरी जिले में कच्चे घरों, मछली पकड़ने वाली नौकाओं, जालों, मछलियों के घरेलू सामग्री के लिए व्यापक और गंभीर नुकसान हुआ है। चिलिका के बाहरी चैनल (पेटा) के सतपदा क्षेत्र में मछली पकड़ने वाली नौकाओं और जालों के करीब 90% हिस्से को गंभीर नुकसान पहुँचा है। कच्चे घर लगभग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे और अर्ध-पक्के घरों ने तूफान के ट्रैक के साथ अपनी छतें खो दीं थीं। घरेलू सामान और संग्रहीत कृषि उत्पाद भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पानी और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष आज भी जारी है। मत्स्य पालन के अलावा कृषि, बागवानी फसलों जैसे आम, काजू और नारियल जैसी रोपण फसलें भी चपेट में आ गई थीं। चक्रवात ने तटीय क्षेत्रों में कृषि भूमि को भी नुकसान पहुँचाया है। राज्य सरकार के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, चक्रवात के कारण ओडिशा में 30 प्रतिशत से अधिक फसल खराब हो गई है। राज्य के 14 जिलों में 1,00,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि बुरी तरह से प्रभावित हुई है।

तमाम जिलों के अलावा विशेष रूप से पुरी जिले में बड़े पैमाने पर नुकसान होने की वजह से सामान्य स्थिति में वापस आने में समय लगेगा। हालाँकि, अग्रिम चेतावनी, आक्रामक घोषणा और निकासी सहित सरकार के उत्कृष्ट प्रयासों के कारण मछुआरों की संपत्ति पर प्रभाव को कम करना संभव था। जगतसिंहपुर जिले के गाँवों में तूफान की तीव्रता कम होने के कारण नुकसान अपेक्षाकृत कम था। टीम ने देखा कि समय पर राहत प्रदान करके सरकार बेहतर कार्य कर रही है। गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में मछुआरों के परिवारों को चावल, नकदी, सोलर लाइट और पॉलीथीन शीट दी गईं। इसके अलावा, राहत कोड के अनुसार गृह निर्माण सहायता भी प्रदान की जाएगी, जैसा कि रिपोर्ट किया गया है।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)